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नशे के कारोबार में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: गौतमबुद्ध नगर में गांजा तस्करी के धंधे में फंसीं 4 महिलाएं, पुलिस ने दबोचा

ग्रेटर नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी का कारोबार अब महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। पारंपरिक रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले इस अवैध धंधे में महिलाओं की एंट्री न केवल तस्करों की नई रणनीति को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दबावों की गहरी जड़ों को भी उजागर करती है। पुलिस की एक संयुक्त कार्रवाई में चार महिलाओं को गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो इस बढ़ते ट्रेंड का जीता-जागता उदाहरण हैं। ये महिलाएं गरीबी, पारिवारिक मजबूरियों या लालच में फंसकर इस खतरनाक रैकेट का हिस्सा बन गईं, जो समाज के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
महिलाओं को मोहरा बनाने की तस्करों की चाल
नारकोटिक्स की दुनिया में महिलाओं का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं, लेकिन गौतमबुद्ध नगर जैसे औद्योगिक और शहरीकरण वाले क्षेत्र में यह तेजी से बढ़ रहा है। तस्कर जानबूचकर महिलाओं को चुनते हैं क्योंकि पुलिस चेकिंग के दौरान उन्हें संदेह कम होता है। घरेलू जिम्मेदारियों वाली ये महिलाएं आसानी से सामान छिपाकर ले जा सकती हैं, और गिरफ्तारी की सूरत में सजा भी कम कठोर मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद आर्थिक संकट ने ग्रामीण और अर्ध-शहरी महिलाओं को ऐसे रास्तों पर धकेला है। बुलंदशहर और अलीगढ़ जैसे जिलों से आईं ये महिलाएं अब ग्रेटर नोएडा के इलाकों में बसकर यह धंधा चला रही थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये महिलाएं लोकल सप्लायर्स से गांजा लेकर दिल्ली-एनसीआर के बाजारों में पहुंचाती थीं, जहां मुनाफा दोगुना होता है।इस कार्रवाई से पता चलता है कि तस्करी का नेटवर्क कितना संगठित है। महिलाओं को छोटे-छोटे बैच में सामान सौंपा जाता है ताकि बड़ा नुकसान न हो। लेकिन पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टीम की मुस्तैदी ने इस चेन को तोड़ दिया।
थाना सूरजपुर पुलिस और टीम की संयुक्त ऑपरेशन में 15 अक्टूबर को ईटा-1 की सर्विस रोड से इन महिलाओं को पकड़ा गया। कुल 4 किलो 470 ग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये आंकी जा रही है।
गिरफ्तार महिलाओं का प्रोफाइल: गरीबी से अपराध की ओर
गिरफ्तार महिलाएं सभी 30-35 साल की उम्र की हैं और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आती हैं। ये अपने मूल गांवों से शहर की चकाचौंध में आईं, लेकिन आर्थिक तंगी ने उन्हें गलत रास्ते पर ला खड़ा किया। इनमें से अधिकांश के खिलाफ पहले से NDPS एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज हैं, जो दोहरावदार अपराध की ओर इशारा करते हैं।

  • इंद्रा देवी (30 वर्ष): मूल रूप से बुलंदशहर की रहने वाली, अब बीटा-2 में रहती हैं। पुलिस रिकॉर्ड में तीन बार NDPS केस, जिसमें आबकारी अधिनियम भी शामिल। वह परिवार की कमाई के लिए इस धंधे में उतरीं।
  • गीता (35 वर्ष): अलीगढ़ से आकर कासना में बस गईं। दो NDPS केस, जिनमें बीटा-2 थाने का ताजा मामला।
  • उर्मिला उर्फ लालमुखी (35 वर्ष): अलीगढ़ की ही, बीटा-2 में रहती हैं। दो मुकदमे, दोनों NDPS से जुड़े।
  • मीना (35 वर्ष): बुलंदशहर की, अब बीटा-2 में। सबसे ज्यादा चार NDPS केस, जो उनकी आदतन अपराधी होने का संकेत देते हैं।

प्रत्येक के पास से 1 किलो से ज्यादा गांजा बरामद हुआ: इंद्रा से 1.1 किलो, गीता से 1.11 किलो, उर्मिला से 1.13 किलो और मीना से 1.13 किलो। थाना सूरजपुर में मुकदमा नंबर 603/2025 के तहत NDPS की धारा 8/20 लगाई गई है।सामाजिक एंगल: क्यों फंस रही हैं महिलाएं?यह मामला केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि समाज की विफलताओं की कहानी है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, घरेलू हिंसा, बेरोजगारी और शिक्षा की कमी महिलाओं को ऐसे रैकेट का शिकार बनाती है। तस्कर उन्हें आसान कमाई का लालच देते हैं, लेकिन गिरफ्तारी के बाद परिवार टूट जाता है।

गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट के मीडिया सेल ने बताया कि ऐसे केस बढ़ रहे हैं, जहां महिलाएं 20-30% तस्करी में शामिल हैं।पुलिस आयुक्त ने कहा, “नशे के खिलाफ जंग में महिलाओं की भागीदारी रोकना चुनौती है। हम कम्युनिटी प्रोग्राम चला रहे हैं ताकि आर्थिक सहायता और जागरूकता से उन्हें मुख्यधारा में लाया जाए।” विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सरकारी योजनाएं जैसे स्किल डेवलपमेंट और माइक्रोफाइनेंस ऐसी महिलाओं को बचा सकती हैं।

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