नोएडा में 15वें उत्तराखंड महाकौथिग का दूसरा दिन: लोक गायकों की धूम, सीएम धामी ने की शिरकत, प्रवासी उत्तराखंडियों का जनसैलाब

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा स्टेडियम में चल रहे 15वें उत्तराखंड महाकौथिग 2025 के दूसरे दिन प्रवासी उत्तराखंडियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोक गायक विवेक नौटियाल, राकेश खनवाल और लोक गायिका दीपा नागरकोटी के गीतों पर दर्शक जमकर थिरके। आयोजन में उत्तराखंड की जीवंत लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।सुबह का सत्र कवि सम्मेलन के नाम रहा। मुख्य अतिथि डीआईजी लॉ एंड ऑर्डर राजीव नारायण मिश्र ने रिबन काटकर और दीप प्रज्वलित कर सत्र का शुभारंभ किया। उन्होंने महाकौथिग मेले की सराहना की और पूरी टीम को बधाई दी। इसके बाद उत्तराखंड के जाने-माने कवियों ने कवि सम्मेलन प्रस्तुत किया।
शाम का सत्र रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा रहा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में सत्र का शुभारंभ किया। सीएम धामी ने आयोजन की भव्यता की दिल खोलकर प्रशंसा की और कहा कि पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उत्तराखंड की लोक कला और संस्कृति को इतनी भव्यता से प्रदर्शित कर रही है, जो तारीफ के काबिल है। उन्होंने अपार भीड़ देखकर कहा, “नोएडा स्टेडियम में उत्तराखंड मूल के लोगों की इस भीड़ को देखकर लग रहा है कि मैं उत्तराखंड में ही हूं।”इस अवसर पर गौतम बुद्ध नगर सांसद महेश शर्मा और दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट भी मौजूद रहे।
महाकौथिग में पहाड़ी उत्पादों, आभूषणों, पोशाकों और पहाड़ी खानपान के करीब 180 स्टाल लगे हैं, जहां लोगों ने जमकर खरीदारी की।मुख्य संयोजक राजेंद्र चौहान, संस्थापक कल्पणा चौहान, चेयरमैन आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष हरीश असवाल, डॉ जी सी वैष्णव व संयोजिका इंद्रा चौधरी समेत पूरी महाकौथिग टीम उपस्थित रही।
इससे पहले आयोजन में मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के लिए प्रवासी उत्तराखंडियों की सराहना की और इसे लोक कला, संगीत व पारंपरिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का सशक्त मंच बताया। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहलों से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने तथा देवभूमि की संस्कृति व डेमोग्राफी की रक्षा के सरकार के संकल्प पर जोर दिया।महाकौथिग प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और लोक संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयोजन की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है कि इसकी अवधि सात दिनों की गई है।

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