- 12 जनवरी को बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों के संगठनों से बैठक होगी।
- 13 जनवरी को औद्योगिक, व्यावसायिक संगठनों और उपभोक्ता फोरमों से चर्चा होगी।
- 22-23 जनवरी को राज्यों के बिजली मंत्रियों की बैठक में बिल और बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण के मसौदे पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।
शैलेंद्र दुबे ने याद दिलाया कि एनडीए सरकार 2014 से अब तक पांच बार इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल ला चुकी है (2014, 2018, 2020, 2021 और 2022) लेकिन बिजली कर्मचारियों और किसानों के विरोध के कारण कोई भी बिल पारित नहीं हो सका।12 जनवरी की बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत सचिव पंकज अग्रवाल करेंगे। इसमें मुख्य रूप से AIPEF, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया और ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पावर इंप्लाइज सहित देश के विभिन्न प्रांतों के करीब 45 संगठन शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ भी इसमें प्रतिभाग करेगा।इस बीच, निजीकरण विरोधी आंदोलन के 407 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन जारी रखे हैं।बिजली कर्मचारी संगठन इस बिल को निजीकरण को बढ़ावा देने वाला और उपभोक्ताओं विशेषकर किसानों व गरीबों के लिए नुकसानदेह बताते हैं, जबकि सरकार का दावा है कि यह बिल बिजली क्षेत्र को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाएगा। बजट सत्र से पहले यह बैठक बिल के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
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