नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रहे हमलों, मंदिरों के विध्वंस, महिलाओं-बच्चों के साथ बर्बरता और जबरन पलायन के विरोध में आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर विदेश नीति की विफलता और हिंदुओं के प्रति “शर्मनाक चुप्पी” का आरोप लगाते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया।
प्रदर्शनों के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाए और मांग की कि भारत-बांग्लादेश के बीच सभी व्यापारिक एवं कूटनीतिक संबंध तत्काल समाप्त किए जाएं, खासकर बिजली आपूर्ति पर रोक लगाई जाए। पार्टी ने महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें चार प्रमुख मांगें शामिल हैं:
-हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी तक भारत-बांग्लादेश के सभी संबंध समाप्त किए जाएं।
-बांग्लादेश को दी जा रही डीजल आपूर्ति पर तुरंत रोक।
-अडानी समूह द्वारा बांग्लादेश को दी जा रही बिजली आपूर्ति पर प्रतिबंध।
-पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दिए जा रहे संरक्षण पर कड़ा निर्णय।
गौतम बुद्ध नगर जिलाध्यक्ष परशुराम चौधरी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि “बांग्लादेश में हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है, मंदिर जलाए जा रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप्पी साधे बैठे हैं। यह चुप्पी कोई भूल नहीं, बल्कि अडानी के हजारों करोड़ के बिजली कारोबार की कीमत पर खरीदी गई है। झारखंड से अडानी के जरिए बांग्लादेश को बिजली सप्लाई हो रही है, और मुनाफे की गंगा बह रही है। अगर मोदी जी ने हिंदुओं के अत्याचारों पर एक शब्द भी बोला, तो उनके दोस्त का धंधा बंद हो जाएगा। देश किसी कॉरपोरेट के मुनाफे के लिए गिरवी नहीं रखा जा सकता।”
चौधरी ने आगे कहा कि यह चुप्पी अब अपराध में भागीदारी बन चुकी है, और यदि केंद्र ने सख्त कदम नहीं उठाए तो आप आंदोलन को और उग्र रूप देगी।
प्रदर्शन के दौरान नोएडा समेत अन्य जिलों में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नीलम यादव, ओबीसी प्रकोष्ठ के जतन भाटी, दिलदार अंसारी, केशव उपाध्याय, मीनाक्षी श्रीवास्तव और गौरव गौतम जैसे प्रमुख नेता मौजूद रहे।
पुलिस के साथ झड़प की खबरें
कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया, जिससे धक्का-मुक्की और छोटी-मोटी झड़प की स्थिति बनी। आप ने पुलिस के इस रवैये की कड़ी निंदा की और कहा कि लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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