इलाहाबाद हाई कोर्ट की ‘सुवास प्रकोष्ठ’ पहल: अब सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसले हिंदी में पढ़ें, गौतमबुद्ध नगर में जागरूकता शिविर आयोजित

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
भारत की न्याय व्यवस्था को आम जनता के लिए अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाने की दिशा में इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण पहल के तहत अब उच्चतम न्यायालय तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय हिंदी भाषा में उपलब्ध हैं। इस प्रयास को “सुवास प्रकोष्ठ” (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर – SUVAS) के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अनुवाद टूल है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, गौतमबुद्ध नगर ने मंगलवार को दीवानी न्यायालय परिसर के सभाकक्ष में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया। शिविर में पैनल अधिवक्ताओं, पराविधिक स्वयंसेवकों, मध्यस्थों और एलएडीसीएस में नामित अधिवक्ताओं को इस पहल के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। शिविर का उद्देश्य विधिक जागरूकता फैलाना और अधिक से अधिक लोगों तक यह सुविधा पहुंचाना था।

अपर जिला जज/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंद्रमोहन श्रीवास्तव ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देशानुसार यह कदम उठाया गया है। SUVAS टूल से अंग्रेजी में लिखे गए निर्णयों का हिंदी में अनुवाद किया जा रहा है, ताकि आम नागरिक अपनी भाषा में न्यायिक फैसलों को समझ सकें। यह पहल न्याय को सरल, सुलभ और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

शिविर की अध्यक्षता अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम मयंक त्रिपाठी ने की, जबकि जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अतुल श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजन हुआ। अपर जिला जज सौरभ द्विवेदी भी मौजूद रहे।

शिविर में इलाहाबाद हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइटों के लिंक साझा किए गए, जहां अनुवादित निर्णय देखे जा सकते हैं:https://www2.allahabadhighcourt.in/ahcr (ई-इलाहाबाद उच्च न्यायालय निर्णय पत्रिका – हिंदी संस्करण सहित)
https://elegalix.allahabadhighcourt.in/elegalix/translation/vernacular2.html (हिंदी में अनुवादित निर्णयों का पोर्टल)

इन पोर्टलों पर सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के हजारों निर्णय हिंदी में उपलब्ध हैं। अनुवाद AI आधारित होने के कारण सामान्य जानकारी के लिए हैं, और कानूनी उपयोग के लिए मूल अंग्रेजी संस्करण से सत्यापन की सलाह दी जाती है।शिविर में अपील की गई कि जनपद बार एसोसिएशन, पीएलवी, जिला प्रशासन, स्थानीय प्राधिकरणों, विधि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के सहयोग से इस पहल का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए।

यह पहल 2019 में शुरू हुए SUVAS प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा विकसित AI टूल है और अब कई हाई कोर्ट्स में लागू हो चुका है। गौतमबुद्ध नगर जैसे क्षेत्रों में ऐसे शिविर आम लोगों के लिए उपयोगी है।

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