ब्रेकिंग न्यूज: यूजीसी के नए इक्विटी नियमों पर बवाल तेज, कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कविता से दिया तीखा विरोध संकेत

नई दिल्ली, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ के खिलाफ विरोध अब चरम पर पहुंच गया है। देश के जाने-माने कवि और जनप्रिय वक्ता डॉ. कुमार विश्वास ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर दिवंगत कवि रमेश रंजन मिश्रा की मार्मिक पंक्तियाँ शेयर करते हुए UGC नियमों को वापस लेने की मांग की।
डॉ. कुमार विश्वास ने पोस्ट में लिखा:

“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो मेरा,
(स्व० रमेश रंजन) #UGC_RollBack

यह पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई, जिसमें हजारों लाइक्स, रीपोस्ट और कमेंट्स आए। कई यूजर्स ने इसे UGC के नियमों के खिलाफ एक भावुक और मजबूत संकेत माना। कुमार विश्वास की इस पोस्ट के बाद #UGC_RollBack ट्रेंड और तेज हो गया। TV9 भारतवर्ष, India TV, ABP News और Times Now Navbharat जैसे प्रमुख न्यूज चैनलों ने इसे प्रमुखता से कवर किया, जहां इसे “कवि कुमार विश्वास ने UGC नियमों का विरोध किया” के रूप में हाइलाइट किया गया।

UGC के नए नियम क्या हैं और क्यों हो रहा विरोध?
UGC ने 13 जनवरी 2026 से ये नियम लागू किए, जिनका मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना, समानता बढ़ाना और शिकायतों के लिए सख्त व्यवस्था बनाना है।
प्रमुख प्रावधान:

  • हर विश्वविद्यालय/कॉलेज में इक्विटी कमेटी और इक्विटी स्क्वॉड का गठन अनिवार्य।
  • SC/ST/OBC/महिला/दिव्यांग प्रतिनिधियों वाली कमेटी।
  • 24×7 हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और जांच की व्यवस्था।
  • उल्लंघन पर संस्थान की मान्यता रद्द, फंडिंग रोकने जैसी सख्त कार्रवाई।

ये नियम सुप्रीम कोर्ट के रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के निर्देशों पर आधारित हैं,लेकिन विरोध करने वाले (खासकर जनरल कैटेगरी के छात्र, शिक्षक और संगठन) इसे “सवर्ण विरोधी” बता रहे हैं। उनका कहना है:

  • नियम सवर्णों को पहले से अपराधी मानते हैं।
  • झूठी शिकायतों का दुरुपयोग हो सकता है (ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया)।
  • इक्विटी कमेटी में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं।
  • संवैधानिक समानता का उल्लंघन।

विरोध अब सड़कों, सोशल मीडिया और राजनीति तक फैल गया। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हो चुकी है। कई BJP नेताओं और युवा मोर्चा के सदस्यों ने भी नाराजगी जताई।

क्या होगा आगे?
सरकार की ओर से स्पष्टीकरण आया कि नियम निष्पक्ष होंगे और दुरुपयोग नहीं होगा, लेकिन विरोध कम नहीं हो रहा। डॉ. कुमार विश्वास जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व का शामिल होना इस मुद्दे को भावनात्मक और व्यापक स्तर पर ले जा रहा है। कविता के माध्यम से उठाई गई यह आवाज अब शिक्षा, सामाजिक न्याय और राजनीति का बड़ा केंद्र बन गई है।
क्या UGC नियम वापस होंगे या संशोधित?
आने वाले दिनों में यह साफ होगा, लेकिन फिलहाल #UGC_RollBack का ट्रेंड और डॉ. कुमार विश्वास की पोस्ट ने इसे राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है।

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