राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो मेरा,
(स्व० रमेश रंजन) #UGC_RollBack
यह पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई, जिसमें हजारों लाइक्स, रीपोस्ट और कमेंट्स आए। कई यूजर्स ने इसे UGC के नियमों के खिलाफ एक भावुक और मजबूत संकेत माना। कुमार विश्वास की इस पोस्ट के बाद #UGC_RollBack ट्रेंड और तेज हो गया। TV9 भारतवर्ष, India TV, ABP News और Times Now Navbharat जैसे प्रमुख न्यूज चैनलों ने इसे प्रमुखता से कवर किया, जहां इसे “कवि कुमार विश्वास ने UGC नियमों का विरोध किया” के रूप में हाइलाइट किया गया।
- हर विश्वविद्यालय/कॉलेज में इक्विटी कमेटी और इक्विटी स्क्वॉड का गठन अनिवार्य।
- SC/ST/OBC/महिला/दिव्यांग प्रतिनिधियों वाली कमेटी।
- 24×7 हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल और जांच की व्यवस्था।
- उल्लंघन पर संस्थान की मान्यता रद्द, फंडिंग रोकने जैसी सख्त कार्रवाई।
ये नियम सुप्रीम कोर्ट के रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों के निर्देशों पर आधारित हैं,लेकिन विरोध करने वाले (खासकर जनरल कैटेगरी के छात्र, शिक्षक और संगठन) इसे “सवर्ण विरोधी” बता रहे हैं। उनका कहना है:
- नियम सवर्णों को पहले से अपराधी मानते हैं।
- झूठी शिकायतों का दुरुपयोग हो सकता है (ड्राफ्ट में झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया)।
- इक्विटी कमेटी में जनरल कैटेगरी का प्रतिनिधित्व नहीं।
- संवैधानिक समानता का उल्लंघन।
विरोध अब सड़कों, सोशल मीडिया और राजनीति तक फैल गया। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हो चुकी है। कई BJP नेताओं और युवा मोर्चा के सदस्यों ने भी नाराजगी जताई।
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