विनोद शर्मा
(नोएडा खबर डॉट कॉम)
उत्तर प्रदेश की सियासी जंग अब औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी हैऔर इस बार गौतमबुद्ध नगर (नोएडा क्षेत्र) बन रहा है चुनावी मैदान का पहला युद्धक्षेत्र।
2027 विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले, मार्च 2026 में तीनों प्रमुख पार्टियां—समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी—एक साथ इस क्षेत्र से अपना-अपना बिगुल फूंकने की तैयारी में हैं। यह इलाका न सिर्फ दिल्ली-NCR का गेटवे है, बल्कि जातीय समीकरण, विकास के वादे और ऐतिहासिक दबदबे का केंद्र भी है। यहां से शुरू होने वाली जंग पूरे पश्चिमी यूपी और फिर पूरे प्रदेश की दिशा तय कर सकती है।
सपा का पहला दांव: 28 मार्च से नोएडा में अखिलेश का बिगुल
समाजवादी पार्टी ने 28 मार्च 2026 को नोएडा से ही 2027 विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत करने का ऐलान कर दिया है। अखिलेश यादव खुद इस रैली या कार्यक्रम की कमान संभालेंगे। यह फैसला रणनीतिक है 2012 में भी अखिलेश ने नोएडा से ही चुनावी अभियान शुरू किया था, जिसके बाद सपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई थी। अब अखिलेश PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करते हुए यहां से शुरुआत कर रहे हैं। नोएडा में युवा, मिडिल क्लास, किसान और प्रवासी वोटरों का मिश्रण है, जहां सपा पिछले चुनावों में पिछड़ती रही है। लेकिन 2024 लोकसभा में PDA की सफलता के बाद अखिलेश का दांव है कि नोएडा से लहर शुरू करके पश्चिमी यूपी में बीजेपी का किला तोड़ा जाए। खासकर दादरी, जेवर और नोएडा सीटों पर फोकस, जहां बीजेपी का मजबूत गढ़ है।
बसपा की काउंटर मूव: 15 मार्च को मायावती का दलित प्रेरणा स्थल पर बड़ा कार्यक्रम
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती भी पीछे नहीं हैं। कांशीराम के जन्मदिन 15 मार्च को नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल (या संबंधित स्मारक/स्थल) पर बड़ा कार्यक्रम होने की संभावना है। यह मायावती का पैतृक जिला है—गौतमबुद्ध नगर में उनका जन्मस्थान और राजनीतिक जड़ें गहरी हैं। BSP ने 2027 के लिए अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान पहले ही कर दिया है, कोई गठबंधन नहीं। मायावती का फोकस दलित वोट को एकजुट करना और PDA फॉर्मूले को काउंटर करना है। 15 मार्च का कार्यक्रम न सिर्फ कांशीराम को श्रद्धांजलि होगा, बल्कि दलित समुदाय में BSP की वापसी का संदेश भी देगा। नोएडा में दलित वोट BSP के लिए निर्णायक रहा है—अगर यहां से मायावती मजबूत शुरुआत करती हैं, तो सपा और बीजेपी दोनों के वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
बीजेपी की काउंटर स्ट्रैटेजी: जेवर एयरपोर्ट और मथुरा विकास पर फोकस, मार्च में ही शुरुआत संभव
बीजेपी भी मार्च 2026 में ही यूपी चुनाव की औपचारिक शुरुआत कर सकती है, और इसका केंद्र जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और मथुरा का विकास होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार 2026 में जेवर एयरपोर्ट का लोकार्पण/उद्घाटन करने की तैयारी में है—यह प्रोजेक्ट नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है, जो लाखों नौकरियां, निवेश और कनेक्टिविटी लाएगा। बीजेपी इसे “विकास का नया अध्याय” बताकर पश्चिमी यूपी में प्रचार करेगी। साथ ही मथुरा में बांके बिहारी मंदिर और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विकास कार्यों को हाईलाइट किया जाएगा—राम मंदिर के बाद यह हिंदुत्व + विकास का कॉम्बिनेशन होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह नोएडा से विधायक हैं और 2017 से लगातार जीत रहे हैं—उनकी लोकल पकड़ मजबूत है। बीजेपी का प्लान है कि मार्च में ही बड़े कार्यक्रमों से जवाब दे, ताकि सपा और बसपा की शुरुआत को काउंटर किया जाए।
गौतमबुद्ध नगर क्यों बना चुनावी जंग का पहला मैदान?
जातीय समीकरण: गुर्जर, ठाकुर, ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और यादव—सभी यहां मौजूद।
विकास vs सामाजिक न्याय: बीजेपी जेवर एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करेगी; सपा PDA और रोजगार/किसान मुद्दों पर; बसपा दलित अस्मिता पर।
ऐतिहासिक महत्व: 2012 से बीजेपी यहां मजबूत, लेकिन 2012 में सपा की लहर शुरू हुई थी। अब तीनों पार्टियां इसी इलाके से 2027 की जंग शुरू कर रही हैं।
वोटर बेस: NCR का प्रभाव—युवा, मिडिल क्लास बदलाव चाहते हैं, लेकिन बीजेपी की मशीनरी मजबूत।
यह मार्च 2026 यूपी की सियासत का “मार्च टू पावर” बन सकता है। अगर सपा यहां अच्छी शुरुआत करती है, तो PDA लहर बनेगी। बसपा दलित वोट को साध लेगी तो वोट स्प्लिट होगा। और बीजेपी जेवर-मथुरा कार्ड से विकास की इमेज बनाए रखेगी। असली जंग तो 2027 में होगी, लेकिन पहला गोला गौतमबुद्ध नगर से ही छूट चुका है। कौन जीतेगा यह पहला राउंड? समय बताएगा।

![]()
