- फीस बढ़ोतरी की सीमा: नई सत्र 2026-27 में पिछले साल के मुकाबले अधिकतम 7.23% फीस बढ़ाई जा सकेगी। इससे ज्यादा वृद्धि की अनुमति नहीं होगी।
- यूनिफॉर्म पर रोक: स्कूल 5 साल तक यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। अगर बदलाव जरूरी हो तो जिला शुल्क नियामक समिति से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
- किताबें और स्टेशनरी: स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें, ड्रेस, जूते-मोजे खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। हर साल किताबें बदलने पर भी रोक लगाई गई है। स्कूलों को NCERT की किताबों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्विमिंग पूल नियम: बिना अनुमति (NOC) के स्विमिंग पूल नहीं चलाया जा सकेगा। जहां पूल संचालित हो रहा है, वहां लड़कों के लिए पुरुष कोच और लड़कियों के लिए महिला कोच अनिवार्य होगा।
- पारदर्शिता अनिवार्य: हर स्कूल को अपनी वेबसाइट पर फीस बढ़ोतरी की पूरी डिटेल अपलोड करनी होगी, ताकि अभिभावक आसानी से जानकारी ले सकें।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाईजिलाधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी:
- पहली बार: ज्यादा ली गई फीस वापस + 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
- दूसरी बार: फीस वापस + 5 लाख रुपये जुर्माना।
- तीसरी बार: विकास निधि की अनुमति वापस और स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश।
स्कूल प्रबंधन पर पूरी जिम्मेदारी होगी और उल्लंघन की स्थिति में कोई ढील नहीं बरती जाएगी।शिकायत कैसे दर्ज करें?अभिभावक फीस बढ़ोतरी, यूनिफॉर्म, किताबों या अन्य किसी समस्या की शिकायत feecommitteegbn@gmail.com (mailto:feecommitteegbn@gmail.com) पर ईमेल कर सकते हैं।बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह, मुख्य कोषाधिकारी शिखा गुप्ता, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रदीप गोयल, दिल्ली पब्लिक स्कूल ग्रेटर नोएडा की प्रधानाचार्या सीमा राय और एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के अभिभावक प्रशांत सिंह समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।जिलाधिकारी मेधा रुपम ने सभी निजी स्कूलों से इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने मनमानी पर लगाम कसने का फैसला किया है, ताकि शिक्षा का बोझ आम परिवारों पर अनावश्यक रूप से न बढ़े।
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