इंटरव्यू: शोर से दूर, संगीत की गहराई में डूबे संगीतकार कनिष शर्मा से एक खुली बातचीत

नई दिल्ली/मुंबई, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
आज के तेज़-रफ्तार डिजिटल युग में, जहां सोशल मीडिया पर रातोंरात स्टार बनना आम बात हो गई है, वहीं संगीतकार कनिष शर्मा एक अलग राह चुनकर चल रहे हैं। वे शोर-शराबे से दूर, संगीत की उस गहराई की तलाश में हैं जो समय के साथ और मजबूत होती जाए। 2014 से इंडस्ट्री में सक्रिय कनिष ने जल्दबाज़ी में प्रसिद्धि के बजाय कला की मजबूत नींव रखने को तरजीह दी है।हमने हाल ही में कनिष से उनके सफर, चुनौतियों और भविष्य की योजनाओं पर बात की।

प्रश्न: कनिष जी, आपका संगीत का सफर कैसे शुरू हुआ? जम्मू से मुंबई तक का यह ट्रांजिशन कैसा रहा?
कनिष शर्मा: जम्मू में पला-बढ़ा हूं, जहां संगीत घर-परिवार और स्थानीय संस्कृति का हिस्सा था। लेकिन असली चुनौती मुंबई आने के बाद शुरू हुई। यहां प्रतिस्पर्धा बहुत है, हर कोई कुछ नया करने की कोशिश में लगा रहता है। शुरुआत में मैं गायक के रूप में आया था, लेकिन धीरे-धीरे समझ आया कि संगीत की असली ताकत कंपोजिशन और ऑर्केस्ट्रेशन में है। मुंबई ने मुझे अनुशासन सिखाया—काम सिर्फ करना नहीं, उसे सही तरीके से करना है।

प्रश्न: आपने फिल्मों में काफी काम किया है। “Gone Kesh”, “Kaun Kitney Paani Mein”, “Lucknow Times”, “Babloo Happy Hai” जैसी फिल्मों के अलावा अब एक नई फीचर फिल्म पर काम चल रहा है। इन प्रोजेक्ट्स से क्या सीखा?

कनिष शर्मा: “Gone Kesh” (2019) मेरे लिए बहुत खास रहा—वहां भावनात्मक गहराई वाली कहानी थी, और संगीत को उसी के अनुरूप बनाना पड़ा। “Bibi”, “Dil Dhoondhata Hai” जैसे गाने लोगों को छू गए। अन्य फिल्मों में भी विविधता मिली—कभी हल्का-फुल्का, कभी गंभीर। अभी एक नई फीचर फिल्म पर काम चल रहा है, जिसमें बड़े नाम हैं। ये प्रोजेक्ट्स सिखाते हैं कि संगीत कहानी का हिस्सा होता है, न कि सिर्फ बैकग्राउंड।

प्रश्न: विज्ञापनों में भी आपने सैकड़ों कैंपेन के लिए संगीत बनाया। यह अनुभव फिल्म संगीत से कैसे अलग रहा?

कनिष शर्मा: विज्ञापन छोटे लेकिन बहुत सटीक होते हैं—30 सेकंड में पूरी कहानी कहनी पड़ती है। इससे मेरी शैली में विविधता आई, तेज़ निर्णय लेने की आदत बनी। ब्रांड की भावना को समझना और उसे धुन में ढालना एक अलग कला है। फिल्मों में समय मिलता है गहराई विकसित करने का, जबकि विज्ञापनों में तुरंत प्रभाव छोड़ना पड़ता है। दोनों से बैलेंस सीखा।

प्रश्न: “Almari Ka Achaar” जैसे प्रोजेक्ट में भारतीय जड़ों को वैश्विक टच देना—यह कैसे संभव हुआ?

कनिष शर्मा: “Almari Ka Achaar” मेरे लिए खास था क्योंकि यह भारतीय घरेलू जीवन, संस्कृति और भावनाओं पर था। मैंने पारंपरिक तत्वों को आधुनिक साउंडस्केप के साथ जोड़ा। वैश्विक संवेदना यानी ऐसी धुन जो सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोग महसूस कर सकें। भारतीय जड़ें मेरे लिए आधार हैं, लेकिन संगीत की भाषा यूनिवर्सल होनी चाहिए।

प्रश्न: अब आप स्वतंत्र संगीत की ओर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। यह बदलाव क्यों?

कनिष शर्मा: पहले सिर्फ काम पूरा करने पर ध्यान था—डेडलाइन, क्लाइंट, प्रोडक्शन। अब सही दिशा तय करने पर। स्वतंत्र संगीत में मैं अपनी बात कह सकता हूं, बिना किसी बाहरी दबाव के। यह मेरी रचनात्मकता को नई ऊंचाई दे रहा है। हाल के समय में कुछ इंडिपेंडेंट ट्रैक्स पर काम किया है, जो जल्द रिलीज होंगे।

प्रश्न: आज के दौर में जहां हर कोई वायरल होने की कोशिश करता है, आप शोर से दूर क्यों रहना पसंद करते हैं?

कनिष शर्मा: तेज़ प्रसिद्धि आती है, लेकिन टिकती नहीं। मैं लंबे समय तक टिकने वाली कला बनाना चाहता हूं। संगीत में गहराई, अर्थ और ईमानदारी होनी चाहिए। शोर बहुत है, लेकिन जो चुप रहकर सुनता है, वही असली धुन पकड़ पाता है। मैं उसी राह पर हूं—धीरे लेकिन मजबूती से।

कनिष शर्मा का यह सफर साबित करता है कि संगीत सिर्फ धुन नहीं, एक जीवन दर्शन भी है। वे न सिर्फ कंपोज कर रहे हैं, बल्कि खुद को और अपनी कला को निरंतर बेहतर बना रहे हैं। आने वाले समय में उनके स्वतंत्र काम और नई फिल्म से उम्मीद है कि उनकी यह गहराई और ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी।

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