नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
सवर्ण समाज गौतमबुद्ध नगर ने यूजीसी के नए नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) के खिलाफ जनाक्रोश रैली की घोषणा की है। यह रैली गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को सुबह 9:30 बजे सेक्टर-21A, नोएडा स्टेडियम के गेट नंबर-4 से शुरू होगी।
रैली के संयोजक पुष्कर शर्मा ने बताया कि रैली का मार्ग नोएडा स्टेडियम से शुरू होकर सेक्टर-19 स्थित सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय तक जाएगा, जहां प्रदर्शनकारी ज्ञापन सौंपेंगे। सवर्ण समाज गौतमबुद्ध नगर की इकाई ने इस रैली को शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ इरादों वाला बताया है।
विरोध का मुख्य कारण
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित इन नियमों को जातिगत भेदभाव रोकने और उच्च शिक्षा में समानता बढ़ाने के लिए लाया गया है। इसमें विश्वविद्यालयों/कॉलेजों में इक्विटी कमेटी, इक्विटी स्क्वॉड, 24×7 हेल्पलाइन और सख्त निगरानी व्यवस्था अनिवार्य की गई है। लेकिन सवर्ण समाज (जनरल कैटेगरी) इसे “काला कानून” बता रहा है। उनका आरोप है कि:यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों/शिक्षकों के अधिकार छीनता है।
इक्विटी कमेटी में SC, ST, OBC, PwD और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है, लेकिन सवर्णों का नहीं।
शिकायतों का दुरुपयोग हो सकता है, और सामान्य वर्ग के लिए कोई समान सुरक्षा नहीं। शिक्षा को अधिकार की बजाय बोझ बनाता है, जिससे आने वाली पीढ़ी बौद्धिक रूप से प्रभावित होगी।
सवर्ण समाज के युवाओं ने कहा, “अब और नहीं! चुप्पी तोड़ना जरूरी है। UGC-2026 जैसा काला कानून शिक्षा, छात्रों और सामाजिक न्याय पर सीधा हमला है। यह कानून हमारे अधिकार छीनने, भविष्य को अंधकार में धकेलने और आवाज दबाने की साजिश है। अगर आज नहीं बोले, तो कल बोलने का हक भी नहीं बचेगा।”
अपील और संदेश
संगठन ने सभी सदस्यों से अपील की है कि इस दमनकारी कानून के खिलाफ अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। उन्होंने जोर दिया: “हम शांत रहेंगे, लेकिन कमजोर नहीं। हम कानून नहीं तोड़ेंगे, लेकिन अन्याय को स्वीकार भी नहीं करेंगे। UGC-2026 को सरकार को वापस लेना ही होगा।”
देशव्यापी संदर्भ
यह रैली देशभर में UGC नियमों के खिलाफ बढ़ते विरोध का हिस्सा है। यूपी, दिल्ली, बिहार, राजस्थान सहित कई राज्यों में छात्र, शिक्षक और सवर्ण संगठन (जैसे सवर्ण आर्मी, करणी सेना) प्रदर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर #UGC_RollBack ट्रेंड कर रहा है। कुछ BJP नेता भी विरोध में शामिल हुए हैं, और मामला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होगा और यह संविधान के दायरे में रहेगा। लेकिन विरोधी इसे रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन बता रहे हैं।
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