नोएडा में गैस संकट: कालाबाजारी चरम पर, ब्लैक में ₹1500-₹3000 तक बिक रहे सिलेंडर

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध का सीधा असर नोएडा में घरेलू चूल्हे पर पड़ने लगा है। नोएडा की सड़कों पर सुबह से ही महिलाएं और परिवार खाली गैस सिलेंडर लेकर लंबी कतारों में खड़े हैं। सदरपुर, छलेरा, बरौला व सेक्टर 22 और अन्य इलाकों में गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ उमड़ रही है। वहीं, दूसरी तरफ कालाबाजारी का बाजार गरम है – फर्जी डिलीवरी दिखाकर गोदामों से सिलेंडर निकालकर ब्लैक में ₹1500 से ₹3000 (कुछ जगहों पर इससे भी ज्यादा) तक बेचे जा रहे हैं। घरेलू सिलेंडर (14.2 kg) की आधिकारिक कीमत ₹910.50 के आसपास है, लेकिन सप्लाई की कमी और पैनिक बाइंग ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।

यह संकट अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का सबसे प्रत्यक्ष असर है। युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को प्रभावित किया है, जो दुनिया के बड़े हिस्से के तेल-गैस शिपमेंट का मुख्य रास्ता है। भारत अपनी जरूरत का 80-85% LPG मिडिल ईस्ट (खासकर ईरान, सऊदी अरब, कतर आदि) से आयात करता है, और इस रूट पर डिसरप्शन से ग्लोबल सप्लाई चेन बिगड़ गई है।

मुख्य प्रभाव और स्थिति
घरेलू उपयोग पर असर: सरकार ने घरेलू LPG को प्राथमिकता दी है, लेकिन डिलीवरी में 5-10 दिन या ज्यादा की देरी हो रही है। पैनिक बाइंग और होर्डिंग बढ़ने से ब्लैक मार्केट फल-फूल रहा है। नोएडा में कई रिपोर्ट्स में घरेलू सिलेंडर भी ब्लैक में ₹1500 तक बिकते दिखे हैं।
कमर्शियल सेक्टर सबसे बुरी तरह प्रभावित: होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे व्यापारी बंद होने की कगार पर हैं। कमर्शियल सिलेंडर (19 kg) ब्लैक में ₹3000 तक पहुंच गए हैं (सामान्य कीमत ₹1900 के आसपास)। कई जगह रेस्टोरेंट मेन्यू से आइटम हटा रहे हैं या बंद हो रहे हैं।
सरकार के कदम:रिफिल बुकिंग का न्यूनतम गैप 21 से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया (हॉर्डिंग रोकने के लिए)।
रिफाइनरीज को LPG प्रोडक्शन 10% तक बढ़ाने के आदेश।
Essential Commodities Act लागू कर ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती – डिस्ट्रीब्यूटर्स पर निगरानी बढ़ाई गई।
कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिका से अतिरिक्त 1 मिलियन टन गैस की व्यवस्था की बात।
कीमत अपडेट: घरेलू सिलेंडर में ₹60 की बढ़ोतरी के बाद नोएडा में ₹910.50 (मार्च 2026)। लेकिन ब्लैक में दोगुनी-तिगुनी कीमतें।

यह युद्ध सिर्फ ऊर्जा संकट नहीं, बल्कि आम आदमी के चूल्हे तक पहुंच गया है। जहां पहले सिर्फ कमर्शियल यूज प्रभावित था, अब घरेलू स्तर पर भी पैनिक और कालाबाजारी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो आयात बिल बढ़ेगा, सब्सिडी पर बोझ पड़ेगा और महंगाई और तेज हो सकती है।सरकार और ऑयल कंपनियां (IOC, BPCL, HPCL) सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कुछ दिनों तक यह हाल बना रह सकता है।

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