“ऑपरेशन अपराजेय”दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा: गौतमबुद्ध नगर पुलिस की संवेदनशील भूमिका की एक सच्ची कहानी

विनोद शर्मा
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
जब समाज के सबसे कमजोर वर्ग — दिव्यांग बच्चे — सुरक्षा और देखभाल की अपेक्षा करते हैं, तब गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने एक मिसाल पेश की है। पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देशन और अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव नारायण मिश्र के पर्यवेक्षण में शुरू किया गया “ऑपरेशन अपराजेय” सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि पुलिस की संवेदनशीलता और मानवीय दायित्व का जीवंत प्रमाण है।
यह कहानी उन 1645 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की है, जिन्हें गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में चिन्हित किया गया है। हर बच्चा अपनी चुनौतियों के साथ जी रहा है, लेकिन अब उनके साथ खड़ी है एक संवेदनशील पुलिस व्यवस्था।
मिशन शक्ति केंद्र अब इन बच्चों का स्थायी संरक्षण कवच बन गए हैं। हर थाने में पूर्ण गोपनीयता के साथ इन बच्चों का पूरा विवरण, माता-पिता का नाम, पता और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज की जा रही है। महिला बीट अधिकारी, जो इस अभियान की रीढ़ हैं, हर 15 दिन में इन बच्चों, उनके अभिभावकों और केयर टेकर से व्यक्तिगत संपर्क करेंगी। वे सिर्फ हाजिरी नहीं लेंगी, बल्कि उनकी कुशल-क्षेम पूछेंगी, उनकी जरूरतें समझेंगी और भरोसा दिलाएंगी कि वे अकेले नहीं हैं।
केयर टेकर का हर 15 दिन में चरित्र सत्यापन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर बच्चे को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से बेहतर अस्पताल में ले जाया जाएगा। हर बच्चे को बताया जाएगा कि मुश्किल घड़ी में Dial-112 और Child Helpline-1098 पर कॉल करना है। बच्चों की सुरक्षा या गरिमा से जुड़ी किसी भी संभावित घटना की निरंतर निगरानी रखी जाएगी।इसके साथ ही अंतर-विभागीय समन्वय के जरिए Neighbourhood Security Plan भी तैयार किया जा रहा है, ताकि पूरा समाज इन बच्चों की सुरक्षा में भागीदार बने।
पुलिस कमिश्नरेट ने एक विशेष हेल्पलाइन 8595902539 भी जारी की है। दिव्यांग बच्चे या उनके अभिभावक किसी भी समस्या, शिकायत या सलाह के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं — और त्वरित कार्रवाई का भरोसा है।मैक्स हॉस्पिटल नोएडा और अमिटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा इस सप्ताह महिला बीट अधिकारियों और अन्य पुलिस कर्मियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे इन बच्चों से और बेहतर तरीके से जुड़ सकें।
पूरे अभियान की नोडल अधिकारी बनी हैं पुलिस उपायुक्त (महिला सुरक्षा)यह अभियान बताता है कि पुलिस सिर्फ कानून का पहरेदार नहीं, बल्कि समाज की संवेदना का प्रतीक भी हो सकती है। श्रीमती लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में गौतमबुद्धनगर पुलिस ने साबित किया है कि जब इंसानियत और ड्यूटी साथ चलती है, तो कमजोरों की सुरक्षा मजबूत हो जाती है।ऑपरेशन अपराजेय नाम ही कहता है — ये बच्चे अपराजेय हैं, और अब उनकी सुरक्षा भी अपराजेय बन रही है।यह नहीं सिर्फ एक सरकारी योजना है, बल्कि पुलिस की उस संवेदनशील छवि की कहानी है, जो हर मां-बाप को भरोसा दिलाती है कि उनके दिव्यांग बच्चे अकेले नहीं हैं — पूरी पुलिस व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।

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