कोलकाता, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनावों ने एक नया इतिहास रचा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की भारी जीत के साथ सुवेंदु अधिकारी राज्य के 9वें मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेने जा रहे हैं। ममता बनर्जी को नंदीग्राम (2021) और भवानीपुर (2026) दोनों सीटों पर हराने वाले इस नेता की यात्रा छात्र कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री पद तक की है। यह कहानी है आंदोलन, रणनीतिक बदलाव, संघर्ष और मजबूत इच्छाशक्ति की।
जन्म और परिवार की पृष्ठभूमि
सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पुरबा मेदिनीपुर जिले के कर्कुली (कांथी क्षेत्र) गांव में हुआ था। वे महिष्य क्षत्रिय समुदाय से हैं। उनका परिवार राजनीति से गहराई से जुड़ा है। पिता शिशिर कुमार अधिकारी कांग्रेस से शुरूआत कर तृणमूल कांग्रेस में आए और केंद्र में राज्य मंत्री भी रहे। भाई दिब्येंदु अधिकारी भी राजनीति में सक्रिय रहे। इस परिवार की पूर्व मेदिनीपुर में मजबूत जड़ें सुवेंदु की राजनीतिक ताकत का मुख्य आधार बनीं। सुवेंदु अविवाहित हैं और सादा जीवन जीते हैं।
शिक्षा
सुवेंदु ने पी.के. कॉलेज, कांथी से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। बाद में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (एम.ए.) की डिग्री हासिल की।
राजनीतिक यात्रा: शुरुआत से मुख्यमंत्री तक
छात्र राजनीति और शुरुआती कदम (1980-1990 के दशक)
सुवेंदु की राजनीतिक यात्रा 1989 में कांग्रेस छात्र परिषद से शुरू हुई। वे पी.के. कॉलेज में छात्र संघ के प्रतिनिधि बने। 1995 में मात्र 25 वर्ष की आयु में कांथी नगर पालिका के पार्षद चुने गए। 1998 में पिता के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।
सुवेंदु की राजनीतिक यात्रा 1989 में कांग्रेस छात्र परिषद से शुरू हुई। वे पी.के. कॉलेज में छात्र संघ के प्रतिनिधि बने। 1995 में मात्र 25 वर्ष की आयु में कांथी नगर पालिका के पार्षद चुने गए। 1998 में पिता के साथ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए।
तृणमूल कांग्रेस में उभार और नंदीग्राम आंदोलन (2000 के दशक)
2006 में कांथी दक्षिण से विधायक चुने गए और कांथी नगर पालिका के चेयरमैन भी बने। 2007 का नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन उनकी राजनीति का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने के कारण उन्हें “नंदीग्राम हीरो” कहा गया। यह आंदोलन तृणमूल कांग्रेस को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में निर्णायक रहा।2009 और 2014 में तामलुक लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
2006 में कांथी दक्षिण से विधायक चुने गए और कांथी नगर पालिका के चेयरमैन भी बने। 2007 का नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन उनकी राजनीति का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। इस आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने के कारण उन्हें “नंदीग्राम हीरो” कहा गया। यह आंदोलन तृणमूल कांग्रेस को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में निर्णायक रहा।2009 और 2014 में तामलुक लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
मंत्री पद और पार्टी में मतभेद (2016-2020)
2016 में नंदीग्राम से विधायक बने और ममता बनर्जी सरकार में परिवहन मंत्री बने। वे ममता के विश्वसनीय सहयोगी थे। लेकिन 2020 में पार्टी के अंदर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से मतभेद बढ़े।
2016 में नंदीग्राम से विधायक बने और ममता बनर्जी सरकार में परिवहन मंत्री बने। वे ममता के विश्वसनीय सहयोगी थे। लेकिन 2020 में पार्टी के अंदर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से मतभेद बढ़े।
तृणमूल से भाजपा में बदलाव (2020)
17 दिसंबर 2020 को तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया। 19 दिसंबर 2020 को अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। कई तृणमूल नेता और कार्यकर्ता उनके साथ आए।
17 दिसंबर 2020 को तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया। 19 दिसंबर 2020 को अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। कई तृणमूल नेता और कार्यकर्ता उनके साथ आए।
भाजपा में नई भूमिका और 2021 चुनाव
2021के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया। यह “जायंट किलर” वाली जीत थी। वे विधानसभा में विपक्ष के नेता बने और पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख चेहरे बन गए।
2021के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया। यह “जायंट किलर” वाली जीत थी। वे विधानसभा में विपक्ष के नेता बने और पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख चेहरे बन गए।
2026 चुनाव और मुख्यमंत्री पद
2026 के चुनावों में सुवेंदु ने नंदीग्राम से अपनी जीत दोहराई (पाबित्रा कर को 9665 वोटों से हराया) और भवानीपुर में ममता बनर्जी को 15105 वोटों से हराया। भाजपा की भारी जीत में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। 9 मई 2026 को वे पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यह भाजपा की बंगाल में पहली सरकार है।
2026 के चुनावों में सुवेंदु ने नंदीग्राम से अपनी जीत दोहराई (पाबित्रा कर को 9665 वोटों से हराया) और भवानीपुर में ममता बनर्जी को 15105 वोटों से हराया। भाजपा की भारी जीत में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। 9 मई 2026 को वे पश्चिम बंगाल के 9वें मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यह भाजपा की बंगाल में पहली सरकार है।
उपलब्धियां और छवि
सुवेंदु अधिकारी ग्रासरूट स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हैं, खासकर पूर्व मेदिनीपुर में। नंदीग्राम-सिंगुर आंदोलनों में योगदान तृणमूल की सफलता का आधार बना। बाद में पार्टी बदलकर उन्होंने भाजपा को बंगाल में नई ताकत दी। वे सादगी, अनुशासन और जनसंपर्क के लिए जाने जाते हैं। उनकी यात्रा रणनीतिक बदलाव और मजबूत नेतृत्व की मिसाल है।सुवेंदु अधिकारी अब बंगाल की नई राजनीतिक शुरुआत के प्रतीक हैं। छात्र कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री तक की उनकी कहानी कई युवा नेताओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। पश्चिम बंगाल के लोग उनके नेतृत्व से राज्य के विकास की उम्मीद कर रहे हैं।
