गौतमबुद्ध नगर/ लखनऊ, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
समाजवादी पार्टी (सपा) में ब्राह्मण समाज को लेकर आंतरिक असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। सपा नेता राघवेंद्र दुबे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी पर निशाना साधा है।राघवेंद्र दुबे, जो 26 वर्ष से सपा से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, ने लिखा कि भाटी जी के ब्राह्मण समाज पर लगातार अपमानजनक बयान पार्टी की छवि खराब कर रहे हैं और ब्राह्मण वोटरों को दूर भगा रहे हैं।
राजकुमार भाटी पर सीधा हमला
दुबे ने भाटी के एक वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें ब्राह्मणों और वैश्याओं की तुलना करते हुए कहा गया कि “ब्राह्मण कोई भला नहीं होता है, वैश्या में कोई भली हो सकती है लेकिन ब्राह्मण नहीं”। उन्होंने इसे नफरत भरा और शर्मनाक बताया।राघवेंद्र दुबे ने आगे लिखा:
“अगर रोजाना गाली देने और अपमानित करने से सपा की सरकार बन रही है तो इस गति को और बढ़ानी चाहिए। मैं 2000 से पार्टी में सक्रिय हूं, लेकिन आज तक किसी समाज को भला-बुरा नहीं कहा। ब्राह्मण समाज बीजेपी से खफा होकर सपा की ओर आ रहा था, लेकिन भाटी जी जैसे बयानों से वे दूर जा रहे हैं।”
ब्राह्मणवाद vs ब्राह्मण और पार्टी की रणनीति
दुबे ने आरोप लगाया कि भाटी जी अक्सर ब्राह्मणों पर कटाक्ष करते हैं और यह सोची-समझी रणनीति लगती है। उन्होंने सनातन धर्म, हिंदू परंपराओं और ब्राह्मणों पर लगातार प्रहार का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि इससे सपा को 2027 के विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान होगा।उन्होंने बंगाल में सायोनी घोष वाले मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी को ऐसे मामलों में रोकना चाहिए, वरना हार के बहाने बाद में ढूंढने से कोई फायदा नहीं।
अखिलेश यादव से सीधी अपील
राघवेंद्र दुबे ने अखिलेश यादव से मांग की:
” राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने प्रवक्ताओं को धर्म और जाति विशेष पर टिप्पणी न करने की हिदायत दी थी, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा। इससे बेहतर है कि जितने ब्राह्मण सपा से जुड़े हैं, उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दो और नए ब्राह्मण सदस्यता पर प्रतिबंध लगा दो।”
विरासत और विरोधाभास
दुबे ने स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र और बृजभूषण तिवारी जैसे ब्राह्मण नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी विरासत वाली पार्टी में आज ब्राह्मणों का अपमान हो रहा है। साहिबाबाद में पूर्व विधायक पंडित अमरपाल शर्मा द्वारा आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन का उदाहरण देते हुए पूछा कि हजारों ब्राह्मणों को जोड़ने की कोशिश को रोजाना के बयानों से क्यों मटियामेट किया जा रहा है?
उन्होंने अखिलेश यादव द्वारा केदारेश्वर महादेव मंदिर और मुलायम सिंह यादव द्वारा हनुमान जी की प्रतिमा बनाने का जिक्र करते हुए सवाल किया कि “मंदिर बनवाने वाले नेता को भी क्या ब्राह्मण पाखंड का ज्ञान दिया जाएगा?
धर्म निजी मामला है।”
राघवेंद्र दुबे ने अंत में कहा कि समय रहते अगर यह बात समझ आ जाए तो अच्छा है, वरना पार्टी को बड़ा नुकसान होगा।अभी तक अखिलेश यादव या सपा की ओर से इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजकुमार भाटी के बयानों को लेकर पार्टी में बहस तेज हो गई है, खासकर 2027 चुनाव की तैयारियों के बीच।
