नोएडा (नोएडा खबर डॉट कॉम)
20 अगस्त 2026 की सुबह नोएडा के सेक्टर-128 स्थित लेबर कैंप में एक आम सी बात थी। झारखंड से आकर मजदूरी करने वाले एक गरीब श्रमिक परिवार के तीन बच्चे—दो करीब पांच साल के और एक करीब दस साल का—घर से निकल गए थे। शायद खेलने निकले होंगे, शायद किसी चीज की खोज में। लेकिन जब दोपहर बीतने लगी और शाम ढलने लगी, तो मां-बाप की सांसे अटकने लगीं। आसपास तलाशा, पड़ोसियों से पूछा, कैंप के कोने-कोने छान मारे… लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं।
आखिरकार बेचैन परिजन थाना सेक्टर-126 पहुंचे और अपनी पीड़ा बताई।सूचना मिलते ही थाना सेक्टर-126 की पुलिस टीम ने इसे सिर्फ एक “गुमशुदगी” का मामला नहीं माना। उन्होंने इसे तीन मासूम जिंदगियों की चिंता समझा। तुरंत कार्रवाई शुरू हुई। आसपास के इलाकों में गश्त, स्थानीय लोगों से पूछताछ, सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच… हर संभव माध्यम आजमाया गया। पुलिसकर्मियों की मेहनत और त्वरित सोच ने कमाल कर दिखाया। कुछ ही देर में तीनों बच्चों का सुराग सेक्टर-132 नोएडा में मिला। वे सकुशल थे।जब पुलिस टीम ने तीनों मासूमों को उनके माता-पिता के सामने खड़ा किया, तो उस पल का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।
मां की आंखों से आंसू छलक पड़े, पिता के चेहरे पर राहत की मुस्कान तैर गई। जो परिवार कुछ घंटे पहले बेचैनी और डर में डूबा हुआ था, वह अब खुशी से झूम रहा था। परिजनों ने थाना सेक्टर-126 पुलिस की त्वरित कार्रवाई, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के लिए दिल से आभार जताया।यह घटना सिर्फ तीन बच्चों के मिलने की कहानी नहीं है। यह उस पुलिस की कहानी है जो गरीब मजदूर परिवार की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझती है। यह उस संवेदनशीलता की कहानी है जो सामान्य ड्यूटी से आगे बढ़कर मानवीय कर्तव्य निभाती है। झारखंड से आए इस परिवार के लिए नोएडा सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि सुरक्षा का भरोसा भी बन गया।
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की यह कार्रवाई हमें याद दिलाती है कि सही समय पर सही कदम उठाने से न सिर्फ जिंदगियां बचती हैं, बल्कि समाज में विश्वास भी मजबूत होता है। तीन मासूमों की सुरक्षित वापसी आज न सिर्फ एक परिवार के लिए खुशी का पल है, बल्कि पूरे शहर के लिए प्रेरणा का स्रोत भी। क्योंकि जब पुलिस संवेदनशील होती है, तो हर लापता बच्चा घर लौट आता है।
