– 18 महीनों में 3348 महिला-पुरुषों की गुमशुदगी हुई दर्ज, 2962 को किया सकुशल बरामद
नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने गुमशुदा और अपहृत व्यक्तियों की खोज को अपनी प्राथमिकता बना रखा है। पुलिस कमिश्नर श्रीमती लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में 1 जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 तक के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं किसंवेदनशीलता और तकनीकी प्रयासों से सैकड़ों परिवारों में फिर से खुशी लौटी है।इस अवधि में कुल 3348 स्त्री-पुरुषों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें से 2962 यानी 88.47 प्रतिशत को सकुशल बरामद कर परिजनों से मिलाया गया। बच्चों के मामले में सफलता और भी ज्यादा रही। 650 बालक-बालिकाओं के अभियोग दर्ज हुए, जिनमें 619 यानी 95.23 प्रतिशत सकुशल मिल गए।
गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने 18 महीने के जोन -वार आंकड़े भी जारी किए हैं। पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नोएडा जोन में 965 वयस्कों में से 810 (83.93 प्रतिशत) और 249 बच्चों में से 236 (94.77 प्रतिशत) बरामद हुए। सेंट्रल नोएडा जोन में सबसे बेहतर नतीजे रहे, यहां 1702 वयस्कों में से 1555 (91.36 प्रतिशत) और 258 बच्चों में से 252 (97.67 प्रतिशत)। ग्रेटर नोएडा जोन में 681 वयस्कों में से 597 (87.66 प्रतिशत) और 143 बच्चों में से 131 (91.60 प्रतिशत) सकुशल मिले।
पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, मुखबिर तंत्र और अन्य जिलों-राज्यों की पुलिस से समन्वय का भरपूर इस्तेमाल किया। शेष मामलों के लिए जोनल स्तर पर विशेष टीमें बनाई गई हैं, जो लगातार काम कर रही हैं।कुछ इलाकों को हॉटस्पॉट चिन्हित किया गया है, जैसे नोएडा में सदरपुर, सलारपुर, बरोला; सेंट्रल नोएडा में भंगेल, इलाहाबास, कुलेसरा; और ग्रेटर नोएडा में कासना व जेवर। इन जगहों पर नियमित गश्त, चेकिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि घटनाएं कम हों।
तलाश आसान नहीं होती। कई बार परिवार देर से सूचना देते हैं, जिससे ‘गोल्डन पीरियड’ निकल जाता है। कुछ गुमशुदा डिजिटल माध्यम नहीं इस्तेमाल करते या मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हैं, जिससे पहचान मुश्किल हो जाती है। फिर भी पुलिस हर मामले को गंभीरता से लेती है।
दो उदाहरण याद रखने लायक हैं। कासना थाना पुलिस ने मानसिक रूप से अस्वस्थ 10 वर्षीय बालक को करीब चार महीने बाद मथुरा के बालगृह से सकुशल बरामद कर परिवार से मिलाया। सेक्टर-49 थाना पुलिस ने दो नाबालिग बालिकाओं को सिर्फ कुछ दिनों में खोज निकाला। दोनों मामलों में परिवारों के चेहरे फिर से खिल उठे।ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों की राहत हैं जिन्हें अपने प्रियजन वापस मिले। गौतमबुद्धनगर पुलिस मानवीय संवेदना के साथ काम कर रही है और शेष मामलों को भी जल्द सुलझाने का प्रयास जारी है। हर गुमशुदा व्यक्ति को घर लौटाने का सफर अभी भी जारी है।
