खास खबर:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी का एनएसए निरस्त किया, कोर्ट ने राज्य का बयान ‘मनगढ़ंत कहानी’ बताया, 5 लाख मुआवजे का आदेश

प्रयागराज / नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की स्नातक और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) की हिरासत रद्द कर दी है। इसके साथ ही राज्य सरकार को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि राज्य की ओर से पेश किया गया वृत्तांत ‘मनगढ़ंत कहानी’ है।कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि आकृति किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही यूपी सरकार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया। यह राशि संबंधित अधिकारियों, जिनमें गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी भी शामिल हैं, के वेतन से वसूली जाएगी।

क्या है मामला

आकृति चौधरी, 25 वर्ष, इतिहास स्नातक हैं और मजदूर बिगुल दस्ता से जुड़ी बताई जाती हैं। अप्रैल 2026 में नोएडा में मजदूरों ने वेतन और सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। बाद में प्रदर्शन हिंसक हो गया। पुलिस ने आकृति और पत्रकार-कार्यकर्ता सत्यम वर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने पत्थरबाजी और आगजनी के लिए उकसाया। मई में दोनों पर एनएसए लगाया गया। आकृति करीब पांच महीने से हिरासत में थीं।

पुलिस ने उस समय दावा किया था कि उनके पास मजबूत इलेक्ट्रॉनिक और वीडियो साक्ष्य हैं। कोर्ट में राज्य पक्ष को अतिरिक्त समय देकर वीडियो पेश करने की मांग की गई, लेकिन पीठ ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि आकृति पहले ही पांच महीने जेल में बिता चुकी हैं।

कोर्ट ने क्या कहा

पीठ ने गिरफ्तारी और बीएनएसएस की धारा 126 तथा 130 के तहत नोटिस जारी करने के क्रम की जांच की। राज्य का कहना था कि आकृति को 12 अप्रैल सुबह 10:56 बजे गिरफ्तार किया गया और नोटिस दिया गया। कोर्ट ने जनरल डायरी के आधार पर कहा कि रिकॉर्ड से लगता है कि पहले गिरफ्तारी हुई और नोटिस बाद में तैयार हुआ। पीठ ने टिप्पणी की कि उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया, पहले गिरफ्तार कर लिया गया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि 11 अप्रैल को हिंसा नहीं हुई और जो हिंसा हुई वह उनकी गिरफ्तारी के बाद बताई गई। अधिवक्ताओं के अनुसार कोर्ट ने माना कि आकृति ने ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे हिंसा भड़के, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है।

अभी रिहाई क्यों नहीं

एनएसए हटने के बावजूद आकृति जेल में रह सकती हैं, क्योंकि नोएडा मजदूर प्रदर्शन से जुड़े अन्य मुकदमों में जमानत अभी बाकी है। रिपोर्टों के अनुसार उनके खिलाफ करीब 11 एफआईआर दर्ज हैं। कुछ मामलों में सत्र न्यायालय से जमानत मिल चुकी है, कुछ अभी लंबित हैं।आकृति के समर्थकों ने कहा है कि यह फैसला न्याय की लड़ाई में बड़ी राहत है, लेकिन अन्य अवैध रूप से बंद कार्यकर्ताओं और मजदूरों की रिहाई तक संघर्ष जारी रहेगा। विस्तृत लिखित आदेश अभी आना बाकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *