नोएडा: साइबर ठगी के दो शातिर गिरफ्तार, 10.95 लाख के अलावा 4 करोड़ से अधिक की फ्रॉड से जुड़े खाते

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
थाना साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले दो युवक अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अभियुक्तों ने अन्य साइबर ठगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराकर करोड़ों की धोखाधड़ी में सहयोग किया।

प्रभारी डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में अभियुक्तों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, 13 मार्च 2026 को एक पीड़ित ने थाना साइबर क्राइम पर शिकायत दर्ज कराई कि अज्ञात ठगों ने खुद को TRAI अधिकारी बताकर फोन किया। उन्होंने पीड़ित की सिम से अश्लील वीडियो भेजे जाने की झूठी जांच का हवाला देकर मुंबई क्राइम ब्रांच/सीबीआई जांच के नाम पर डराया और डिजिटल अरेस्ट कर धोखाधड़ी की। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच टीम गठित की गई।

19 मार्च 2026 को संकलित सूचना और खुफिया इनपुट के आधार पर थाना साइबर क्राइम पुलिस ने सेक्टर-63 क्षेत्र से दो अभियुक्तों रिषभ तिवारी पुत्र राकेश तिवारी, निवासी जिला अमेठी, उम्र 21 वर्ष व कुवंर शुक्ला पुत्र रामगोपाल शुक्ला, निवासी जिला अमेठी, उम्र 20 वर्ष को दबोचा।

अपराध का तरीका
डीसीपी साइबर क्राइम के अनुसार
ये दोनों शातिर अपराधी साइबर ठगी करने वाले अन्य ठगों को अपने बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे। उनके खातों में ठगी से प्राप्त 10.95 लाख रुपये जमा हुए। इनके संयुक्त/संबंधित बैंक खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों से 6 शिकायतें दर्ज हैं (उत्तर प्रदेश-1, महाराष्ट्र-1, तमिलनाडु-1, दिल्ली-1, बिहार-1, जम्मू-कश्मीर-1), जिनमें कुल करीब 4 करोड़ 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई।

मुकदमा विवरण

इन दोनों के खिलाफ धारा 308(2), 318(4), 319(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा धारा 66D आईटी एक्ट, थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्धनगर में मुकदमा दर्ज किया गया।इनकी गिरफ्तारी के बाद घटना में प्रयुक्त 02 मोबाइल फोन बरामद किया गया है।
डीसीपी साइबर क्राइम शैव्या गोयल के हवाले से पुलिस ने कहा कि यह गिरफ्तारी साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार चल रही सतर्कता का नतीजा है। उन्होंने साइबर जागरूकता संदेश जारी करते हुए कहा:साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 डायल करें या National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज कराएं।
“डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई वास्तविक प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस, CBI, ED, इनकम टैक्स अधिकारी आपको फोन पर अरेस्ट नहीं कर सकता।
यदि कोई CBI/ED/पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी दे तो बिना डरे निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में शिकायत करें।
अश्लील वीडियो, मादक पदार्थ, हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग या फर्जी आयात-निर्यात के नाम पर डराने वाले कॉल्स पर घबराएं नहीं, तुरंत पुलिस को सूचित करें।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि ऐसी ठगी से बचने के लिए अज्ञात कॉल्स पर व्यक्तिगत/बैंक जानकारी न दें और संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल शिकायत करें। जांच जारी है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

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