गाजियाबाद/इलाहाबाद(नोएडा खबर डॉट कॉम)
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के चुनाव, पदाधिकारियों के लंबे समय तक पद पर बने रहने और रखरखाव बकाया न भरने पर वोट छीनने जैसे मुद्दों पर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि इस आदेश की कॉपी हर सोसायटी के नोटिस बोर्ड पर लगनी चाहिए, ताकि आम फ्लैट मालिक भी अपनी बात रख सकें।
यह केस एल्डिको आमन्त्रण अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की याचिका पर चला। सोसायटी के पदाधिकारियों की वित्तीय शक्तियाँ रोकने वाले उप-रजिस्ट्रार के आदेश पर अदालत ने फिलहाल रोक लगा दी है।अदालत ने गौर किया कि कई सोसायटियों में चुनाव समय पर नहीं होते और पुराने पदाधिकारी सालों तक पद संभाले रहते हैं। नियमों में एक तरफ कार्यकाल एक साल का है, दूसरी तरफ उत्तराधिकारी चुने जाने तक पद जारी रखने का प्रावधान है।
अदालत ने पूछा कि क्या इससे चुनाव टालने और सत्ता के दुरुपयोग का रास्ता खुलता है।दूसरा बड़ा मुद्दा वोटिंग का है। कई जगह रखरखाव या बिजली बिल न भरने पर सदस्यों का वोट रोक दिया जाता है। अदालत ने कहा कि बकाया वसूलना सोसायटी का हक है, लेकिन इससे मैनेजमेंट मनमाने ढंग से वोटर लिस्ट काट सकता है। सरकार से पूछा गया है कि कानून में ऐसा प्रावधान है या नहीं और दुरुपयोग रोकने के क्या उपाय हैं।
अदालत ने प्रदेश सरकार और सोसायटी रजिस्ट्रार से इन सवालों पर हलफनामा मांगा है। साथ ही गाजियाबाद उप-रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि क्षेत्र की हर ग्रुप हाउसिंग सोसायटी को आदेश भेजें और नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवाएँ।फ्लैट मालिक, चुने हुए सदस्य या कोई भी व्यक्ति अपनी राय उप-रजिस्ट्रार के जरिए, सीधे हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को या हस्तक्षेप आवेदन से दे सकता है।
अदालत ने साफ किया कि ये सुझाव मात्र होंगे, सबूत नहीं।उप-रजिस्ट्रार ने सोसायटियों को पत्र लिखकर कहा है कि आदेश नोटिस बोर्ड पर लगाएँ, निवासियों को बताएँ और 7 दिन में फोटो सहित रिपोर्ट भेजें। न मानने पर अवमानना हो सकती है।अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को है।
