विनोद शर्मा
नोएडा(नोएडा खबर डॉट कॉम)
कभी-कभी एक छोटी सी देरी और एक बड़ी संवेदनशीलता के बीच फर्क सिर्फ कुछ मिनटों का होता है। मंगलवार को गौतमबुद्धनगर में वही मिनट पुलिस के हाथ में आए — और एक जिंदगी बच गई।
डायल-112 पर फांसी लगाने की सूचना मिली। पीआरवी UP32DG9617 निर्धारित समय के अंदर मौके पर पहुंच गई। पुलिस कांस्टेबल सुधांशु गुप्ता और अर्जुन कुमार ने सिर्फ ड्यूटी नहीं निभाई, उन्होंने इंसान को इंसान समझकर काम किया। फंदे से व्यक्ति को उतारा, तुरंत सीपीआर शुरू किया और सांस लौटने तक रुके नहीं। फिर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया।
इलाज के बाद उसकी स्थिति सुरक्षित हुई।
अस्पताल में सिर्फ दवा नहीं चली। पुलिस ने काउंसलिंग भी की। उस व्यक्ति ने वादा किया कि आगे ऐसा कदम नहीं उठाएगा। परिवार ने पुलिस का हाथ पकड़कर धन्यवाद दिया — तेज पहुंच के लिए नहीं, उस इंसानियत के लिए जो वर्दी के अंदर दिखी।
यह घटना सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं है। यह याद दिलाती है कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में डायल-112 सिर्फ गाड़ी और सायरन नहीं है। यह वो सिस्टम है जो समय पर पहुंचता है, और वो वर्दी है जो संकट में हाथ बढ़ाती है।
गौतमबुद्धनगर पुलिस की यह कार्रवाई कहती है — कानून व्यवस्था निभाना काम है, जान बचाना कर्तव्य है, और किसी टूटे हुए इंसान को दोबारा खड़ा करना इंसानियत है। जब पुलिस समय पर पहुंचती है और दिल से काम करती है, तो एक परिवार टूटने से बच जाता है। यही सबसे बड़ी मिसाल है।

