ग्रेटर नोएडा,( नोएडा खबर डॉट कॉम)
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक में बुधवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनसे किसानों को राहत, लीज डीड प्रक्रिया सरल होने, युवाओं के कौशल विकास और क्षेत्र की सुरक्षा-बिजली व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन दीपक कुमार ने की। इसमें ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार, नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, यीडा के सीईओ आरके सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
1. आपसी सहमति से भूमि देने वाले किसानों को समान लाभ
प्राधिकरण ने आपसी सहमति से भूमि देने वाले किसानों को भी अधिग्रहण के समान सुविधाएं देने का फैसला किया है। 27 अगस्त 2026 की बैठक में दो विकल्प तय किए गए थे—6415 रुपये प्रति वर्ग मीटर और 5725 रुपये प्रति वर्ग मीटर। अब 5725 रुपये प्रति वर्ग मीटर का विकल्प चुनने वाले भू-स्वामियों को छह प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ मिलेगा, जबकि 6415 रुपये वाले विकल्प में यह नहीं मिलेगा। इसके अलावा, 2002 से 2013 के बीच अधिग्रहित/क्रय की गई भूमि से प्रभावित 533 किसानों को भी 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर दिए जाने का प्रस्ताव मंजूर हो गया। यह लाभ अब तक नहीं मिला था। नोएडा और यमुना प्राधिकरण की तर्ज पर ग्रेटर नोएडा के किसानों को भी यह राहत मिलेगी। शासन की सहमति के बाद बोर्ड ने अनुमति दी है।
2. आबादी भूखंड आवंटन की पात्रता में बदलाव
किसानों की मांग पर आबादी भूखंड की पात्रता नियमों में संशोधन किया गया। अब पितामह, पितामही, पिता, माता, पति या पत्नी के साथ सास-ससुर को भी शामिल कर लिया गया है। कई मामलों में किसानों ने भूमि पुत्रवधू के नाम हस्तांतरित की थी, जिससे वे लाभ से वंचित रह जाती थीं। अब सास-ससुर को शामिल करने से पात्रता का दायरा बढ़ा है। मूल निवासी होने और राजस्व अभिलेखों में शर्तों के अनुरूप दर्ज होने की शर्तें बरकरार रहेंगी।
3. लीज डीड आसान, ब्याज माफी का प्रस्ताव
ग्रामीण आबादी की लीज बैक मामलों में कानूनी अड़चनों को दूर करने की पहल हुई है। लीज बैक के लिए जमा धनराशि पर ब्याज माफ करने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। तीन माह से अधिक देरी पर ब्याज और एक वर्ष में भुगतान न होने पर पट्टा निरस्तीकरण का प्रावधान था। साथ ही, किसानों के हिस्से का निर्धारण कर लीज डीड जारी करने का निर्णय लिया गया। शासनादेश 24 अप्रैल 2010 और ग्रामीण आबादी स्थल विनियमावली-2011/2015 के तहत यह फैसला हुआ।
4. लिंक रोड से विस्थापित किसानों को लीज डीड का लाभ
गाजियाबाद में न्यू हॉलैंड ट्रैक्टर फैक्ट्री से एनएच-24 (अब एनएच-9) तक लिंक रोड निर्माण से विस्थापित किसानों के लिए ग्राम चिपियाना खुर्द उर्फ तिगरी में 5.48 एकड़ भूमि पर लीज डीड का प्रस्ताव मंजूर हो गया। 141वीं बोर्ड बैठक के अनुसार, मूल किसानों को (जिनकी भूमि सड़क में आई और नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो) लीज डीड कराई जाएगी। खर्च भी प्राधिकरण वहन करेगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर गठित समिति की संस्तुति के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। किसानों को आवंटन पत्र/नक्शा 11 या बैनामा की मूल प्रति देनी होगी।
5. सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र
सेक्टर ईकोटेक-1 में औद्योगिक भूखंड संख्या-01 की लगभग 32,880 वर्ग मीटर (करीब आठ एकड़) जमीन को कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव मंजूर हुआ। एमएसएमई विभाग की सहमति के बाद निशुल्क आवंटन होगा। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों और सेवा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप तकनीकी/गैर-तकनीकी कौशल, भाषा प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सुविधाएं देना है। हॉस्टल, कार्यालय और प्लेसमेंट सेल भी विकसित किए जाएंगे। स्थानीय युवाओं को देश-विदेश में रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
6. ईकोटेक-1 एक्सटेंशन में पुलिस थाना
ग्राम कासना में प्रस्तावित पुलिस स्टेशन के लिए 3957 वर्ग मीटर भूमि निशुल्क आवंटित करने का प्रस्ताव मंजूर हो गया। अपर पुलिस आयुक्त की मांग पर परियोजना विभाग ने भूखंड चिह्नित किया था। औद्योगिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया। शासन की नीति के तहत औद्योगिक विकास प्राधिकरण पुलिस थानों/चौकियों के लिए भूमि निशुल्क हस्तांतरित कर सकते हैं।
7. 220 केवी का नया बिजलीघर मंजूर
ईकोटेक-10 में मौजूदा 132/33 केवी जीआईएस विद्युत उपकेंद्र को 220/13/33 केवी जीआईएस में अपग्रेड करने का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹226 करोड़ (निर्माण + जमीन) है। इसके लिए 8,945 वर्ग मीटर भूमि उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को निशुल्क दी जाएगी। इससे ईकोटेक-10, ईकोटेक-11, घंघोला, मायचा आदि गांवों, सेक्टरों और औद्योगिक संस्थानों की भविष्य की बिजली जरूरत पूरी होगी।ये निर्णय किसानों की लंबे समय से चल रही मांगों को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं और क्षेत्र के विकास, सुरक्षा तथा बिजली आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
