सनसिटी, गाजियाबाद में ‘जाणता राजा’ महामंचन का समापन: छत्रपति शिवाजी का शौर्य और दिव्य प्रेम का संदेश युवाओं में जगा
नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक: मॉडल भवन विनियम, सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान, आईटी हब, ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स, एआई सिटी और कई किसान व उद्योग अनुकूल फैसले मंजूर
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 145वीं बोर्ड बैठक: किसानों को अधिग्रहण समान लाभ, आबादी भूखंड पात्रता में सास-ससुर शामिल, लीज डीड आसान, कौशल केंद्र-पुलिस थाना व 220 केवी सबस्टेशन मंजूर
नोएडा जोन में त्योहारों से पहले सघन चेकिंग अभियान, 1658 वाहन और 2302 लोगों की जांच
नोएडा: फोनरवा ने पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष स्वर्गीय रामपाल भाटी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक: मॉडल भवन विनियम, सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान, आईटी हब, ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स, एआई सिटी और कई किसान व उद्योग अनुकूल फैसले मंजूर

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा प्राधिकरण की 224वीं बोर्ड बैठक आज 28 अक्टूबर 2026 को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त उत्तर प्रदेश एवं प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रविकुमार एन.जी., यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह तथा बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।बैठक में कुल 11 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका विस्तार से विवरण इस प्रकार है:
1. मॉडल भवन विनियम 2026 को अपनाया गया
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी मॉडल भवन विनियम, 2026 को नोएडा के लिए लागू करने की मंजूरी दे दी गई। जिन बिंदुओं पर प्राधिकरण स्तर पर निर्णय लेना है, उन पर नए नियमों का लाभ देने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी। इससे भवन निर्माण संबंधी नियम एकसमान और आधुनिक हो सकेंगे।
2. सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट मंजूर
नोएडा क्षेत्र के लिए तैयार सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई। इसे शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इस योजना में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों, माल ढुलाई, यातायात प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का पूरा अध्ययन करके शहर की जरूरत के अनुसार कार्ययोजना बनाई गई है। इसका मकसद माल ढुलाई को तेज और सस्ता बनाना, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण कम करना तथा उद्योगों और परिवहन संचालकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इससे नोएडा में व्यापार आसान और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
3. सेक्टर-147 में आईटी/आईटीईएस प्रोजेक्ट की अनुमति
शासन की मंशा के अनुसार विश्वस्तरीय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) हब और ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस बनाने के लिए सेक्टर-147 में संस्थागत आईटी/आईटीईएस उपयोग की 88,000 वर्ग मीटर भूमि पर भू-आवंटन योजना जारी करने की सैद्धांतिक अनुमति दे दी गई।
4. सेक्टर-105 में एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स
सेक्टर-105 में 12,596.64 वर्ग मीटर व्यावसायिक भूमि पर एकीकृत ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स की योजना लाने को मंजूरी दी गई। पूरी भूमि को एक भूखंड के रूप में एकल बोली के जरिए एक पट्टाधारक को दिया जाएगा। योजना में 40 एफएआर, अधिकतम 20 मीटर ऊंचाई और नियमों के अनुसार पार्किंग का प्रावधान होगा। पट्टा लिखने के पांच साल के अंदर अधिकतम तीन चरणों में निर्माण पूरा करके अधिभोग प्रमाणपत्र लेना होगा।
5. नोएडा में एआई सिटी-कम-बिजनेस पार्क
उत्तर प्रदेश प्राइवेट बिजनेस पार्क डेवलपमेंट स्कीम, 2025 को अपनाते हुए नोएडा में एआई सिटी सह बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए मास्टर डेवलपर चुनने की आरएफपी को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी/आईटीईएस, अनुसंधान, स्टार्टअप और कौशल विकास की सुविधाएं होंगी। मास्टर डेवलपर का चयन प्रतिस्पर्धी ई-बिडिंग से होगा और प्रोजेक्ट डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल पर चलेगा। जमीन नोएडा प्राधिकरण के पास रहेगी। 45 साल की छूट अवधि को और 45 साल बढ़ाया जा सकता है तथा निर्मित क्षेत्र का कम से कम 50 प्रतिशत आईटी और ज्ञान आधारित सेवाओं के लिए रखना होगा।
6. सेक्टर-32 में भू-भाटक की दर में एकरूपता
सेक्टर-32 के व्यावसायिक भूखंड सीसी-01 पर बने यूनिटों के उपपट्टाधारकों से लिए जाने वाले वार्षिक भू-भाटक की दर को एकसमान किया गया। पहले ₹612 प्रति वर्ग मीटर सालाना लग रहा था, अब पुनर्गणना के बाद यह लगभग ₹232 प्रति वर्ग मीटर सालाना हो जाएगा। इससे संबंधित लोगों को राहत मिलेगी।
7. एचयूएफ, सोसाइटी और ट्रस्ट को उपपट्टा की सुविधा
अन्य विभागों की तरह अब वाणिज्यिक भूखंडों, उन पर बनी यूनिटों और व्यावसायिक परिसंपत्तियों का उपपट्टा हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), सोसाइटी और ट्रस्ट के नाम पर तथा एक से अधिक नामों में भी किया जा सकेगा। इससे पात्र लोगों के लिए प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
8. यूनिफाइड रेगुलेशंस, 2025 में संशोधन
औद्योगिक इकाइयों से जुड़े यूनिफाइड रेगुलेशंस, 2025 में कुछ बदलावों को मंजूरी दी गई। कार्यशील औद्योगिक इकाइयों का अंतरण शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया। इकाई को चालू करने की मूल अवधि 3 या 5 साल के बाद अधिकतम 3 साल और बढ़ाई जा सकेगी। समयवृद्धि शुल्क भी पहले, दूसरे और तीसरे अतिरिक्त वर्ष के लिए क्रमशः 3.5 और 7 प्रतिशत रखा गया। अंशधारिता बदलाव की सूचना देर से देने पर शुल्क ₹500 से घटाकर ₹300 प्रतिदिन कर दिया गया। प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से एलएलपी में बदलने की प्रक्रिया आसान की गई और पारिवारिक अंशधारिता में शुल्क छूट के लिए शासन की परिवार की परिभाषा अपनाई गई
9. मोबाइल टावर और राइट ऑफ वे की अनुमति ऑनलाइन
भारत सरकार की 17 सितंबर 2024 की अधिसूचना के अनुसार दूरसंचार नीति अपनाई गई। मोबाइल टावर और राइट ऑफ वे की अनुमति अब ऑनलाइन दी जाएगी। पुराने एक लाख या डेढ़ लाख रुपये आवेदन शुल्क और तीन लाख रुपये बैंक गारंटी की शर्त हटा दी गई है। जमीन के ऊपर दूरसंचार नेटवर्क के लिए आवेदन जांच शुल्क ₹10,000 यथावत रहेगा।
10. 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों के त्वरित निपटान के लिए मास्टर प्लान में संशोधन
नोएडा में अधिग्रहित भूमि के बदले काश्तकारों को 5 प्रतिशत विकसित आवासीय भूमि देने का प्रावधान है। ज्यादातर भूखंडों का नियोजन हो चुका है, लेकिन मास्टर प्लान-2031 के अनुसार शहर का विकास लगभग पूरा होने से शेष भूखंडों के नियोजन में दिक्कत आ रही है। किसानों की मांग को देखते हुए त्वरित निपटान के लिए नोएडा मास्टर प्लान-2031 के जोनिंग रेगुलेशन में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया गया। मौजूदा गांव आबादी से लगी जमीन पर 5 प्रतिशत आबादी भूखंडों को फ्लोटिंग यूज के तहत नियोजित किया जा सकेगा। जनसामान्य से आपत्ति-सुझाव लेने के बाद इसे शासन को भेजा जाएगा।
11. प्राधिकरण की संस्थाओं पर 15 मेगावाट सौर ऊर्जा
नोएडा प्राधिकरण के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, बहुमंजिला कार पार्किंग और गंगाजल भूमिगत जलाशयों पर रेस्को मॉडल से लगभग 15 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाने की मंजूरी दी गई। सीवेज प्लांट और जलाशयों पर लगभग 8 मेगावाट तथा बहुमंजिला पार्किंग पर लगभग 7 मेगावाट लगेगा। संबंधित एजेंसी के साथ बिजली खरीद समझौते के आधार पर काम होगा। इससे प्राधिकरण के बिजली खर्च में बचत होगी, स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा और अगले 25 सालों में लगभग पांच लाख टन कार्बन उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।ये निर्णय नोएडा के विकास, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा, किसानों की समस्याओं के समाधान और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *