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सेहत की बात:विटिलिगो: न अभिशाप, न लाइलाज—जागरूकता और स्वीकार्यता की ओर एक कदम-डॉ शीतल यादव, फेलिक्स हॉस्पिटल

नोएडा (नोएडा खबर),
हर साल 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य त्वचा रोग विटिलिगो के बारे में जागरूकता फैलाना और इससे प्रभावित लोगों को समाज में सम्मान व समानता का स्थान दिलाना है। भारत में लगभग 1.9% आबादी इस स्थिति से प्रभावित है, और कुछ क्षेत्रों जैसे गुजरात के कच्छ और राजस्थान में यह आंकड़ा 8% तक पहुंचता है। यह कोई संक्रामक रोग नहीं, बल्कि एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जिसे समझने और स्वीकार करने की जरूरत है।
विटिलिगो क्या है?
विटिलिगो एक त्वचा रोग है, जिसमें मेलानिन (त्वचा को रंग देने वाला तत्व) का उत्पादन रुक जाता है, जिससे त्वचा पर सफेद धब्बे या दाग बनने लगते हैं। फेलिक्स हॉस्पिटल्स, नोएडा की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. शीतल यादव बताती हैं, “विटिलिगो एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा की कोशिकाओं पर हमला करती है। यह थायरॉइड, मधुमेह, मानसिक तनाव, अत्यधिक धूप या चोट के कारण हो सकता है।” यह रोग तीन प्रकार का होता है:
  1. नॉन-सेगमेंटल विटिलिगो: सबसे आम, जिसमें शरीर के दोनों ओर समान दाग बनते हैं।
  2. सेगमेंटल विटिलिगो: शरीर के एक हिस्से तक सीमित, बच्चों में अधिक देखा जाता है।
  3. मिक्स्ड विटिलिगो: दोनों का मिश्रण।
लक्षण: पहचानें और सतर्क रहें
  • त्वचा पर सफेद या रंगहीन चकत्ते, खासकर होंठ, आंखों, हाथ-पैर या जोड़ों के पास।
  • बालों का समय से पहले सफेद होना।
  • शुरुआत में हल्की खुजली या जलन।
  • दाग का धीरे-धीरे बढ़ना।
इलाज: उम्मीद की किरण
हालांकि विटिलिगो का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। डॉ. यादव बताती हैं, “उपचार में स्टेरॉयड क्रीम (जैसे क्लोबेटासोल), फोटोथेरेपी (यूवीबी लाइट), और गंभीर मामलों में स्किन ग्राफ्टिंग शामिल है। नई तकनीकें जैसे रुक्सोलिटिनिब क्रीम (JAK इनहिबिटर) भी प्रभावी हैं।” मेकअप या डिपिग्मेंटेशन तकनीकों से दाग छुपाए जा सकते हैं।
रोकथाम और देखभाल
  • सनस्क्रीन का उपयोग: धूप से त्वचा को बचाएं।
  • चोट से बचाव: त्वचा को जलन या घाव से सुरक्षित रखें।
  • तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान से मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखें।
  • पोषण: विटामिन डी, बी12 और फोलिक एसिड युक्त आहार लें।
सामाजिक और मानसिक प्रभाव
विटिलिगो का सबसे बड़ा असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। बच्चे और महिलाएं सामाजिक तिरस्कार और सौंदर्य की रूढ़ियों के कारण अवसाद, आत्मविश्वास की कमी और सामाजिक दूरी का शिकार हो सकते हैं। डॉ. यादव कहती हैं, “विटिलिगो किसी की पहचान नहीं है। यह सिर्फ एक मेडिकल स्थिति है, जिसे समझकर हम पीड़ितों का मनोबल बढ़ा सकते हैं।”
विश्व विटिलिगो दिवस: एक शुरुआत
2011 में नाइजीरिया की सामाजिक कार्यकर्ता ओगो मेडूवसी और अमेरिकी कार्यकर्ता स्टीवन हरागडॉन ने विश्व विटिलिगो दिवस की शुरुआत की। यह दिन मशहूर पॉप सिंगर माइकल जैक्सन की पुण्यतिथि (25 जून) के रूप में चुना गया, जो स्वयं इस रोग से पीड़ित थे। इसका मकसद है मिथकों को तोड़ना, जागरूकता फैलाना और प्रभावित लोगों को समाज में बराबरी का दर्जा दिलाना।

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