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पीएम के कार्यक्रम से पहले किसान संघर्ष मोर्चा के नेताओं की नजरबंदी: सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का आरोप

ग्रेटर नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
किसान संघर्ष मोर्चा ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। मोर्चा के प्रमुख नेताओं—डॉ. रुपेश वर्मा (जिला अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा), सूरन प्रधान (राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान एकता संघ) और सुखबीर खलीफा (राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान परिषद)—को आज दोपहर 2 बजे तक उनके घरों में पुलिस द्वारा नजरबंद रखा गया। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब मोर्चा ने 10% आबादी प्लॉट, नए कानून, और किसानों की जमीनों के निस्तारण जैसे मुद्दों को लेकर कलेक्ट्रेट पर महापंचायत का ऐलान किया था।पुलिस कमिश्नर के साथ वार्ता के बाद प्रशासन ने किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और मुख्य सचिव व प्राधिकरण अधिकारियों के साथ वार्ता का आश्वासन दिया था, जिसके आधार पर मोर्चा ने महापंचायत स्थगित कर दी थी। हालांकि, नेताओं की नजरबंदी ने सरकार के इरादों पर सवाल उठाए हैं।डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा, “हमारा आंदोलन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण है। पुलिस के आश्वासन पर हमने महापंचायत स्थगित की थी, लेकिन अगर वादे पूरे नहीं हुए तो अक्टूबर में बड़ा आंदोलन होगा।” सुखबीर खलीफा ने सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा, “एक्सपो मार्ट उद्घाटन में उद्योगपतियों का बोलबाला था, लेकिन किसानों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं। विकास परियोजनाएं हमारी जमीन पर बन रही हैं, पर हमें हमारा हक नहीं मिल रहा।”सूरन प्रधान ने गौतम बुध नगर के किसानों की उपेक्षा पर रोष जताते हुए कहा, “जमीनें सस्ते में खरीदकर महंगे दामों पर बेची जा रही हैं, लेकिन 10% प्लॉट का मुद्दा वर्षों से लंबित है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने इस पर एक शब्द नहीं कहा।”किसान संघर्ष मोर्चा ने नजरबंदी को सरकार के डर का सबूत बताते हुए कहा कि किसान आंदोलन की ताकत से प्रशासन भयभीत है। मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो जल्द ही व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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