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नोएडा स्टेडियम में 7 दिन तक उत्तराखंड के महाकौथिग ने मचाई धूम, संस्कृति की दिखी गूंज

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
दिल्ली-एनसीआर में बसे उत्तराखंडी समुदाय के लिए देवभूमि की यादें ताजा करने वाला सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव ‘उत्तराखंड महाकौथिग 2025’ नोएडा के सेक्टर-21ए स्टेडियम में 19 दिसंबर से शुरू होकर आज 25 दिसंबर को समाप्त हो गया।
सात दिनों तक चले इस भव्य आयोजन ने पूरे इलाके को ‘मिनी उत्तराखंड’ में तब्दील कर दिया। पहाड़ी संस्कृति, लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू से स्टेडियम गूंजता रहा, और लाखों की संख्या में लोग यहां पहुंचे।
पर्वतीय सांस्कृतिक संस्था द्वारा आयोजित यह 15वां महाकौथिग प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक मजबूत माध्यम बन चुका है। इस सफल आयोजन में मुख्य संयोजक राजेंद्र चौहान, संस्थापक कल्पना चौहान, चेयरमैन आदित्य घिल्डियाल, संयोजिका इंदिरा चौधरी, अध्यक्ष हरीश असवाल तथा मीडिया प्रभारी रजनी असवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी मेहनत और समर्पण से यह उत्सव हर बार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आयोजन में 150 से अधिक स्टॉल लगे, जहां उत्तराखंड के जैविक उत्पाद, हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े, पारंपरिक आभूषण और पहाड़ी व्यंजन जैसे मंडवे की रोटी, झंगोरे की खीर, रागी मोमोज और विभिन्न दाल-अनाज उपलब्ध थे। दर्शकों ने इनका भरपूर आनंद लिया।सांस्कृतिक मंच पर हर दिन रंगारंग कार्यक्रम हुए।
लोक गायकों जैसे मोहन दा अल्मोड़ा वाले, अमित सागर, कैलाश कुमार और दीवान कनवाल की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छोलिया, झोड़ा-छपेली, पांडव नृत्य और जागर जैसे पारंपरिक लोक नृत्य-गीतों पर लोग झूम उठे। जौनसार क्षेत्र की पूनम-पूरा ने परिधान युगल प्रतियोगिता जीती, जबकि विभिन्न लोक नृत्य प्रतियोगिताओं में दिल्ली की टीमों ने बाजी मारी।
आयोजन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी शिरकत की। उन्होंने स्टॉलों का निरीक्षण किया और मंच से संबोधित करते हुए कहा कि महाकौथिग जैसे कार्यक्रम उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रवासी उत्तराखंडियों को राज्य की संस्कृति का ‘ब्रांड एम्बेसडर’ बताते हुए उन्होंने देवभूमि की विरासत संरक्षण पर जोर दिया।पहले दिन से ही जनसैलाब उमड़ पड़ा था, और अंतिम दिनों में स्टेडियम खचाखच भरा रहा। स्वास्थ्य शिविर जैसे अतिरिक्त आयोजनों ने इसे और विशेष बना दिया। इस महाकौथिग ने न केवल संस्कृति की गूंज फैलाई, बल्कि प्रवासी समुदाय में एकता और उत्साह का संचार किया। आयोजकों ने इसे अब तक का सबसे सफल संस्करण बताया।उत्तराखंड की यह सांस्कृतिक धूम एनसीआर में हर साल की तरह फिर से यादगार बन गई!

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