उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने नोएडा में मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन गठन पर विचार को मंजूरी दी

-सुप्रीम कोर्ट के 13 अगस्त 2025 के आदेश का अनुपालन, -पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित शासन पर जोर
लखनऊ/नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण (NOIDA) को मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन में बदलने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 13 अगस्त 2025 के आदेश के अनुपालन में लिया गया है, जिसमें नोएडा में भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले की जांच के दौरान गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की सिफारिशों पर गौर किया गया।सुप्रीम कोर्ट ने SLP (Crl.) नंबर 1251/2023 (वीरेंद्र सिंह नागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) में पारित आदेश में SIT की रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को सौंपने और इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखने का निर्देश दिया था। SIT ने नोएडा प्राधिकरण में पारदर्शिता की कमी, अनियमित मुआवजा भुगतान (करीब 117 करोड़ रुपये से अधिक की अनियमितताएं) और अधिकारियों की मिलीभगत की गंभीर शिकायतों पर ध्यान दिलाते हुए मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन गठन की सिफारिश की थी।

प्रमुख बिंदु और प्रस्तावित बदलाव

नागरिक-केंद्रित शासन: वर्तमान नोएडा प्राधिकरण के बजाय मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन में निर्वाचित वार्ड पार्षद और मेयर होंगे, जिससे स्थानीय मुद्दों (जैसे अपशिष्ट प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन, बुनियादी ढांचा) पर बेहतर जवाबदेही और त्वरित निर्णय सुनिश्चित होगा।

लोकतांत्रिक भागीदारी:
निवासियों को स्थानीय चुनावों के माध्यम से विकास प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, जिससे सामुदायिक हितों का बेहतर प्रतिनिधित्व होगा।

उदाहरण: बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में महानगर निगम मॉडल से बेहतर सेवा वितरण और जन भागीदारी देखी गई है।
विधिक चुनौतियां:

नोएडा उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के तहत गठित है, जिसमें औद्योगिक विकास, FDI आकर्षण और रोजगार सृजन मुख्य उद्देश्य हैं। मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन गठन के लिए अधिनियम में संशोधन आवश्यक होगा। अनुच्छेद 243Q के परंतुक के अनुसार, औद्योगिक टाउनशिप में नगर पालिका गठन पर रोक है, लेकिन राज्य सरकार इसे बदल सकती है।

वित्तीय प्रभाव:

कैबिनेट नोट के अनुसार, राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यय भार नहीं पड़ेगा; सभी खर्च नोएडा प्राधिकरण द्वारा वहन किए जाएंगे। विभिन्न विभागों (न्याय, वित्त, राजस्व, नगर विकास आदि) ने अनापत्ति दी है, कुछ शर्तों के साथ (जैसे भूमि अर्जन में 2013 के कानून का पालन)।

पृष्ठभूमि: मुआवजा घोटाला और SIT जांच

यह मामला 2021 में पुलिस स्टेशन सेक्टर-20, नोएडा में दर्ज FIR (अपराध संख्या 581/2021) से जुड़ा है, जिसमें वीरेंद्र सिंह नागर (पूर्व विधि अधिकारी) सहित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की धाराओं के तहत आरोप थे। जांच में पाया गया कि किसानों/काश्तकारों को अनुचित रूप से अधिक दर (जैसे 297 रुपये प्रति वर्ग गज) पर मुआवजा दिया गया, जिससे नोएडा को करोड़ों की हानि हुई। SIT ने 15 वर्षों में 20+ मामलों में 117 करोड़ से अधिक अनियमित भुगतान चिह्नित किए।सुप्रीम कोर्ट ने SIT को आगे जांच के निर्देश दिए, जिसमें पूर्व CEOs की संपत्ति जांच भी शामिल है। अदालत ने नोएडा में नए प्रोजेक्ट्स पर EIA और ग्रीन बेंच मंजूरी अनिवार्य की है।
लाभ और प्रभाव

निवासियों को चुनी हुई स्थानीय सरकार मिलेगी, जो वर्तमान में नोएडा में अनुपस्थित है (भारत के प्रमुख शहरों में एकमात्र)।
पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार रुकेगा और सेवा वितरण सुधरेगा।
हालांकि, औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षण पर संभावित प्रभाव की चिंता जताई गई है, लेकिन सरकार इसे संतुलित करने का प्रयास करेगी।

उत्तर प्रदेश सरकार अब इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक विधिक संशोधन और प्रक्रिया पर काम करेगी। यह कदम नोएडा को अधिक लोकतांत्रिक और निवासी-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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