विनोद शर्मा
नई दिल्ली, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
विमल कुमार की कहानी एक ऐसी प्रेरणा है जो बताती है कि सपने देखने की हिम्मत और मेहनत की लगन हो तो कोई भी मुकाम दूर नहीं।
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के छोटे से गांव चांदेमऊ (खीरों ब्लॉक, गुरुबख्शगंज के पास) में जन्मे विमल कुमार एक बेहद साधारण और गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रामदेव ईंट भट्ठे पर मजदूरी करते हैं और कभी-कभी बंटाई पर खेती भी। मां सियावती देवी गृहिणी हैं। दोनों माता-पिता अशिक्षित हैं। परिवार के पास महज एक बीघा जमीन है और आर्थिक हालात इतने तंग रहे कि बड़े शहरों की महंगी कोचिंग का ख्याल तक नहीं आ सकता था।
विमल परिवार की सबसे छोटी संतान हैं—दो बड़े भाई और दो बहनें (जिनकी शादी हो चुकी है)।लेकिन विमल के मन में बचपन से ही कुछ बड़ा करने का जुनून था। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। स्कूल के दिनों में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV Raebareli) से पढ़ाई की, जहां मिली बुनियाद ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी उन्होंने सेल्फ स्टडी और ऑनलाइन संसाधनों से की—कोई महंगी कोचिंग, कोई दिल्ली-लखनऊ का कोटा नहीं।पहले चार प्रयासों में सफलता नहीं मिली। एक बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन सिर्फ 12 अंकों से चूक गए। फिर भी हिम्मत नहीं हारी। असफलताओं ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया। उन्होंने कहा भी कि “नियमित पढ़ाई और समय का सम्मान सफलता की कुंजी है।”
पांचवें प्रयास में आखिरकार 2025 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा (रिजल्ट 2026 में घोषित) में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 107 हासिल की और IAS बन गए।जब विमल ने मां से खुशी-खुशी कहा—”मां, मैं IAS बन गया!”
तो मां ने मासूमियत से पूछा—”IAS क्या होता है?”
विमल ने समझाया—”अफसर, बड़ा अफसर, जो देश की सेवा करता है।”
बस इतना सुनते ही मां की आंखें नम हो गईं। पिता की आंखों में भी गर्व के आंसू थे। गांव में खुशी की लहर दौड़ गई—7 किलोमीटर लंबा जुलूस निकला, लोग फूलों की मालाएं पहनाकर स्वागत कर रहे थे। एक मजदूर का बेटा आज पूरे रायबरेली और उत्तर प्रदेश का गौरव बन चुका था।
विमल की यह कहानी हमें सिखाती है:पृष्ठभूमि कितनी भी कमजोर हो, इरादे मजबूत हों तो रास्ता खुद बन जाता है।
असफलता अंत नहीं, बस एक और कोशिश का बहाना है।
सेल्फ स्टडी, ऑनलाइन संसाधन और अनुशासन से भी दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा पास की जा सकती है।
माता-पिता के आशीर्वाद और परिवार का सहारा सबसे बड़ा बल होता है।
विमल कुमार आज उन लाखों ग्रामीण युवाओं के लिए मिसाल हैं जो सोचते हैं कि “हमारे बस की बात नहीं”। विमल ने साबित कर दिया—बस की बात है, तो बस कर दिखाओ !
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