इच्छाशक्ति की उड़ान: 25 साल की जद्दोजहद के बाद जेवर एयरपोर्ट तैयार, राजनीति-अफसरशाही की टीमवर्क ने दी नई दिशा

विनोद शर्मा
नोएडा/जेवर,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
एक सपना जो 2001 में शुरू हुआ था, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से हकीकत बन रहा है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) को DGCA से एयरोड्रम लाइसेंस मिल चुका है, BCAS से सिक्योरिटी क्लियरेंस हो गया है। अब 45 दिनों में डोमेस्टिक फ्लाइट्स और कार्गो शुरू होने की उम्मीद है, जबकि उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मार्च या अप्रैल में होने वाला है। ठीक इसी समय नोएडा शहर अपनी स्थापना के 50 साल (17 अप्रैल 1976) मना रहा है — जेवर एयरपोर्ट इस गोल्डन जुबली की सबसे बड़ी सौगात बनेगा।

यह सिर्फ कंक्रीट और रनवे का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, अफसरों की मेहनत और किसानों के बलिदान की मिसाल है। बिना इनके यह 25 साल की लड़ाई जीत नहीं पाता।

राजनीतिक अड़ंगेबाजी और अड़चनों का सफर
2001: राजनाथ सिंह ने पहला प्रस्ताव भेजा।
2008: मायावती ने पुश किया।
2012-2014: अखिलेश यादव सरकार ने कैंसल किया, लोकेशन आगरा शिफ्ट करने की कोशिश की।
इन सालों में कानूनी, पर्यावरणीय और राजनीतिक अड़चनें आईं। लेकिन गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने केंद्र में केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री और पर्यावरण राज्यमंत्री रहते कई कानूनी बाधाओं को हटाया। उन्होंने संसद और मंत्रालय स्तर पर जेवर को प्राथमिकता दी, लोकल डिमांड को मजबूत किया और 2014 के बाद मोदी सरकार में प्रोजेक्ट को गति दी। डॉ. शर्मा ने कई बार कहा कि पिछली सरकारों में यह ठंडे बस्ते में था, लेकिन उनकी पहल से यह रिवाइव हुआ।

जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने यूपी विधानसभा में बार-बार एयरपोर्ट की आवाज उठाई, लोकल मुद्दों (किसान, रोजगार, कनेक्टिविटी) को हाइलाइट किया और क्षेत्रीय विकास के लिए दबाव बनाया। उनकी सक्रियता ने प्रोजेक्ट को ग्राउंड लेवल पर सपोर्ट दिया।

अफसरशाही की मजबूत भूमिका

तत्कालीन डीएम बी.एन. सिंह ने जमीन अधिग्रहण की पूरी भूमिका तैयार की
— साइट सिलेक्शन से लेकर रिहैबिलिटेशन पैकेज तक।

एयरपोर्ट के नोडल अफसर शैलेन्द्र भाटिया (YEIDA के एडिशनल CEO) ने साइट तय करने से एयरोड्रम लाइसेंस तक हर स्टेज पर अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कंस्ट्रक्शन, रेगुलेटरी क्लियरेंस और किसान मुद्दों को हैंडल किया। हाल ही में DGCA लाइसेंस मिलने पर उन्होंने कहा कि अब फ्लाइट्स जल्द शुरू होंगी।

यमुना प्राधिकरण (YEIDA) के तत्कालीन CEO डॉ. अरुण वीर सिंह ने पॉलिसी फ्रेमवर्क बनाया, प्रोजेक्ट को ट्रैक पर रखा और एक्सटेंशन तक लीड किया।
वर्तमान CEO आर.के. सिंह ने फाइनल फेज में कमान संभाली —
उद्घाटन की तैयारियां, ऑपरेशनल प्लानिंग और टाइमलाइन को सुनिश्चित किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निर्णायक क्षमता
2017 में CM योगी ने प्रोजेक्ट को रिवाइव किया, जेवर लोकेशन फाइनल की और PPP मॉडल में Zurich को डेवलपर बनाया। उनकी तेज निर्णय क्षमता और इच्छाशक्ति ने राजनीतिक अड़चनों को दूर किया, अफसरों को फ्री हैंड दिया और प्रोजेक्ट को 2021 में ग्राउंडब्रेकिंग तक पहुंचाया। योगी ने कहा है कि UP में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट्स हैं, और जेवर सबसे बड़ा बनेगा। उनकी लीडरशिप के बिना यह इतनी तेजी से नहीं होता।

किसानों का योगदान: बलिदान और मुआवजा
करीब 20+ गांवों की ~5,000 हेक्टेयर (12,000 एकड़) जमीन अधिग्रहित हुई। किसानों ने उपजाऊ जमीन दी, जिसके बदले उदार मुआवजा (कई परिवारों को करोड़ों रुपये) और रिहैब पैकेज मिला। कुछ किसानों ने पैसों से नई जिंदगी शुरू की, लेकिन कई आज भी रोजगार और सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। बिना उनके सहयोग के एयरपोर्ट संभव नहीं होता।

नोएडा के 50 साल: वैश्विक खिड़की खुलेगी
नोएडा 1976 में बना, अब 50वें साल में जेवर एयरपोर्ट से दुनिया भर में ‘नोएडा’ का नाम गूंजेगा। फेज-1 में 12 मिलियन पैसेंजर्स/साल, फ्यूचर में 70-120 मिलियन तक। यह NCR का अल्टरनेटिव हब बनेगा, जॉब्स, इंडस्ट्री और टूरिज्म को बूस्ट देगा।

अब जेवर के पंख लग चुके हैं — नोएडा की नई उड़ान शुरू हो रही है।

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