विनोद शर्मा
नई दिल्ली,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
पश्चिम बंगाल के पुरबा बर्धमान जिले के औसग्राम (SC) क्षेत्र में एक साधारण महिला सुबह-सुबह चार घरों में झाड़ू-पोंछा करती, बर्तन मांजती और परिवार चलाती थी। नाम था — कलिता माजी। महीने की कमाई महज ₹2,500। पति सुब्रत माजी दिहाड़ी मजदूर/प्लंबर का काम करते। न कोई राजनीतिक बैकग्राउंड, न धन-दौलत, न ऊंचा परिवार। सिर्फ मेहनत और हौसला।
कलिता 10 साल से ज्यादा समय से भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता रहीं। लोगों की समस्याएं सुनतीं, मदद करतीं और अपनी जिंदगी की कठिनाइयों को राजनीति में आवाज देती रहीं।
2021 में पहली बार उन्होंने औसग्राम सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा। हारीं, लेकिन 88,577 वोट लेकर सबको हैरान कर दिया। हार ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत किया।
2026 में फिर मौका मिला। कलिता ने फिर मैदान में उतरकर प्रचार किया — सुबह घरों का काम, दिन में चुनाव प्रचार, शाम को परिवार। 29 अप्रैल 2026 को वोटिंग हुई और 4 मई 2026 को नतीजे आए।कलिता माजी ने इतिहास रच दिया!उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराकर औसग्राम की नई विधायक बन गईं। उन्होंने कुल 1,07,692 वोट प्राप्त किए।
कलिता माजी की जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं — यह उन लाखों महिलाओं की जीत है जो रोजाना घरों में काम करती हैं, लेकिन सपने देखने की हिम्मत रखती हैं।तथ्यात्मक मुख्य बातें:
- पेशा: घरेलू सहायिका
- शिक्षा: साक्षर
- उम्र: 38 वर्ष
- पार्टी: भाजपा
- पति: सुब्रत माजी
कलिता ने साबित कर दिया कि पढ़ाई कम हो, जेब खाली हो, फिर भी इरादा मजबूत हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।कलिता माजी का यह सफर हर संघर्षशील व्यक्ति के लिए मिसाल है — कि लोकतंत्र में हर आवाज मायने रखती है, चाहे वो कितनी भी साधारण क्यों न हो।
