नई दिल्ली, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
एक बाल कलाकार से आईएएस अधिकारी तक: एच.एस. कीर्थना की प्रेरणादायक यात्राकर्नाटक की एक छोटी सी बच्ची, मात्र चार साल की उम्र में कैमरे के सामने आ गई। नाम था — एच.एस. कीर्थना। 32 फिल्मों और 48 टीवी सीरियलों में काम करते हुए वो जल्दी ही दर्शकों की प्यारी बन गई। चमचमाती लाइट्स, तालियां, प्रशंसा और सफलता का स्वाद बहुत जल्दी मिल गया।
करियर चरम पर था, लेकिन 15 साल की उम्र में कीर्थना ने वो सब कुछ छोड़ दिया जो हर कोई चाहता है। क्यों? क्योंकि उनके पिता श्रीनिवास एच.टी. का सपना था कि बेटी देश की सेवा करे। उन्होंने कहा था — “तुम्हें आईएएस बनना है।” कीर्थना ने पिता का सपना अपना लिया। चकाचौंध भरे फिल्मी दुनिया को अलविदा कहकर उन्होंने किताबों की दुनिया में कदम रख दिया। रास्ता आसान नहीं था।
पहले उन्होंने कर्नाटक एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (KAS) क्लियर की और दो साल तक अधिकारी के रूप में काम किया। लेकिन उनका लक्ष्य UPSC था। 2013 से तैयारी शुरू की। लगातार पांच प्रयासों में प्रीलिम्स ही नहीं निकला। चारों तरफ निराशा, सवाल और हताशा थी। लोग कहते — “अब छोड़ दो, फिल्मी दुनिया में वापस चली जाओ।” लेकिन कीर्थना ने हार नहीं मानी। उन्होंने NCERT किताबों को अपना बाइबिल बनाया, Insights Secure जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया, टेस्ट सीरीज दी और सबसे महत्वपूर्ण — डिस्ट्रैक्शन से दूर रहीं। सोशल मीडिया, अनावश्यक बातें, सब छोड़ दिया।
छठे प्रयास में आखिरकार सफलता मिली। UPSC CSE 2019 में उन्होंने AIR 167 हासिल किया। लिखित परीक्षा में 794 और इंटरव्यू में 190 अंक पाकर वे आईएएस बन गईं। आज वे कर्नाटक में जिला पंचायत CEO और असिस्टेंट कमिश्नर जैसे पदों पर अपनी सेवाएं दे रही हैं। कीर्थना की कहानी हमें सिखाती है:
- सपना कितना भी बड़ा हो, अगर इरादा सच्चा हो तो रास्ता खुद बन जाता है।
- असफलताएं कोई अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत हैं।
- चमक-दमक छोड़कर भी जीवन बेहद सुंदर और अर्थपूर्ण बनाया जा सकता है।
- परिवार का साथ और लगातार मेहनत किसी भी मुश्किल को पार कर सकती है।
कीर्थना कहती हैं: “मेरे 6 प्रयास बैज ऑफ ऑनर हैं, क्योंकि हर असफलता ने मुझे बेहतर बनाया।” अगर आप भी किसी बड़े सपने के पीछे लगे हुए हैं, बार-बार गिर रहे हैं, तो याद रखिए —
कीर्थना ने साबित किया है कि सच्ची मेहनत और धैर्य कभी व्यर्थ नहीं जाता। तुम्हारा सपना भी पूरा हो सकता है। बस रुकना मत।
