विनोद शर्मा
नोएडा,( नोएडा खबर डॉट कॉम)
39 साल की उम्र में ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अब नई शुरुआत करना बहुत देर हो चुकी है। लेकिन हिमांशु राजपूत ने साबित कर दिया कि सपनों की उम्र कभी नहीं होती।
नोएडा के गौतम बुद्ध नगर निवासी हिमांशु ने महज 66 दिन पहले शूटिंग की दुनिया में कदम रखा था। उनमें से भी सिर्फ 50 दिन ही असली ट्रेनिंग के थे। बाकी समय सिर्फ सीखने और कोशिश करने में बीता। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से सिर्फ 10 दिन पहले उन्होंने अपनी पुरानी अकादमी छोड़कर नोएडा की शूटिंग गुरु अकादमी जॉइन की। वहाँ कोच संगीता सिंह ने उनकी तकनीक, फोकस और मानसिक मजबूती पर इतना काम किया कि 10 दिन में ही कमाल हो गया।
प्रतियोगिता का दिन –चुनौतियों भरा मैदान
मैच शुरू होने से ठीक पहले हिमांशु का चश्मा टूट गया। प्रतियोगिता के दौरान स्कोरिंग मशीन में टेक्निकल गड़बड़ी आई। ज्यादातर लोग इन हालात में हार मान लेते, लेकिन हिमांशु ने धैर्य नहीं छोड़ा। उन्होंने सांस को नियंत्रित रखा, मन को शांत किया और हर शॉट में पूरा ध्यान केंद्रित किया।
नतीजा ? 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक।ये सिर्फ एक मेडल नहीं था । ये 39 साल की उम्र में नए सपने देखने की हिम्मत का मेडल था। ये साबित करता था कि सही मार्गदर्शन, लगातार मेहनत और मजबूत मानसिकता के साथ कम समय में भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।
हिमांशु आज कहते हैं,
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतने कम दिनों में इतना कुछ हासिल हो जाएगा। लेकिन जब आप सही जगह पर सही लोगों के साथ मेहनत करते हो, तो नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है।”
अब उनका अगला लक्ष्य जुलाई में देहरादून में होने वाली राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई करना है। क्वालिफाइंग स्कोर 363 है। और हिमांशु पूरा विश्वास रखते हैं कि अगर यही अनुशासन और भूख बनी रही, तो राष्ट्रीय स्तर पर भी वो अपनी पहचान बनाएंगे।सीख क्या है?
उम्र सिर्फ एक नंबर है।
देर से शुरू करना कोई बुराई नहीं, शुरू न करना बुराई है।
चुनौतियाँ आएंगी, चश्मा टूटेगा, मशीन खराब होगी, लेकिन जो खिलाड़ी अपने लक्ष्य पर नजर जमाए रखता है, वही आखिर में जीतता है।
हिमांशु राजपूत की यह कहानी हर उस व्यक्ति के लिए है जो सोचता है “अब बहुत देर हो गई है”। सपना देखो। शुरू करो। और बीच में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, निशाने से नजर मत हटाओ।
क्योंकि असली जीत उम्र की नहीं, हौसले की होती है।
