


-सनराइज लर्निंग फाउंडेशन की 12वीं बार आयोजित यह प्रतियोगिता बनी प्रेरणा की मिसाल – ऑटिज्म, एडीएचडी से जूझते बच्चे स्केटिंग रिंक पर बने सितारे
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा स्टेडियम के स्केटिंग रिंक पर शनिवार को सिर्फ पहिए नहीं घूमे, बल्कि सपने, साहस और आत्मविश्वास की एक अनोखी उड़ान देखने को मिली।
सनराइज लर्निंग फाउंडेशन द्वारा आयोजित “नोएडा व्हीलर्स” के बारहवें संस्करण में 280 दिव्यांग बच्चे और युवा—जिनमें ऑटिज्म, एडीएचडी, डाउन सिंड्रोम, बौद्धिक दिव्यांगता जैसी चुनौतियाँ थीं—ने रोलर स्केटिंग के माध्यम से दुनिया को बता दिया कि सीमाएँ सिर्फ दिमाग में होती हैं, दिल और हौसले में नहीं।वर्ष 2019 से हर साल दो बार आयोजित होने वाली यह प्रतियोगिता अब दिल्ली-एनसीआर के विशेष बच्चों के लिए एक त्योहार बन चुकी है। इस बार 25 से अधिक विशेष स्कूलों और संस्थानों जैसे ग्रेस, ऐकिडो, निरंतर प्रयास, समृद्धि, जेडी टायलर, होप लर्निंग और शितिक फाउंडेशन के बच्चे शामिल हुए।
4 वर्ष के मासूम से लेकर 30 वर्ष से अधिक उम्र के युवाओं तक—सभी ने बेसिक और एडवांस श्रेणी में हिस्सा लिया और शानदार संतुलन, गति व साहस का प्रदर्शन किया।कार्यक्रम में 50 से अधिक अभिभावक और 85 से अधिक कोच-शिक्षक मौजूद रहे, जिनकी आँखों में गर्व के आँसू थे। मुख्य अतिथि हरिश दीक्षित (जिला अध्यक्ष, शाहदरा), सिद्धार्थ (महासचिव) और इंदरपाल सिंह (राष्ट्रीय समन्वयक, स्पेशल ओलंपिक्स भारत) ने बच्चों को प्रोत्साहित किया।कुल 199 पदक वितरित किए गए—75 स्वर्ण, 68 रजत और 56 कांस्य—लेकिन असली जीत हर उस बच्चे की थी जिसने पहली बार स्केट्स पहने और गिरते-उठते हुए भी मुस्कुराता रहा।
सुरक्षा के लिए फेलिक्स अस्पताल की टीम ने प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किया। सनराइज लर्निंग के व्यावसायिक प्रशिक्षण इकाई के विद्यार्थियों ने “विशेष कैफे” और “विशेष दुकान” के स्टॉल लगाए, जहाँ उन्होंने स्वयं बनाए हस्तनिर्मित उत्पाद बेचे—आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटा लेकिन बड़ा कदम।सार्थी आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत निःशुल्क वाणी और भाषा जांच शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें वाणी चिकित्सक और नैदानिक मनोवैज्ञानिकों ने बच्चों का आकलन किया। प्रत्येक बच्चे को बाद में उनकी व्यक्तिगत भाषा विकास योजना ई-मेल के माध्यम से भेजी जाएगी।
सनराइज लर्निंग फाउंडेशन की संस्थापक एवं ऑटिज्म विशेषज्ञ डॉ. सोनाली कटारिया ने भावुक होकर कहा:
“नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में अनुमानित 12,000 से 14,000 ऐसे बच्चे और युवा हैं जिन्हें मुख्यधारा की शिक्षा या व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं मिल पाता। ऐसे में ‘नोएडा व्हीलर्स’ जैसे छोटे-छोटे प्रयास उनके लिए वह मंच बनते हैं जहाँ वे स्वीकृति महसूस कर सकें, समाज से जुड़ सकें और अपनी छिपी प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकें। यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं—यह साबित करना है कि दिव्यांगता के बावजूद इन बच्चों में कितनी अद्भुत क्षमता, साहस और आत्मविश्वास है।”अभिभावकों ने इसे समावेशिता की जीत बताया। एक माँ ने कहा, “मेरा बेटा आज पहली बार इतने लोगों के सामने स्केटिंग कर रहा था—उसकी आँखों में जो चमक थी, वह मेरे लिए सबसे बड़ा पदक है।”नोएडा व्हीलर्स सिर्फ एक आयोजन नहीं—यह उन हजारों विशेष बच्चों की आवाज है जो कहते हैं:
“हम भी उड़ सकते हैं, बस हमें पहिए दो और थोड़ा सा विश्वास!”
यह कहानी साहस की है, उम्मीद की है, और यह संदेश देती है कि हर बच्चा, हर चुनौती के बावजूद, चमक सकता है।
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