नोएडा में “चर्चा-ए- आजादी’: एक मंच, अनेक आवाजें, सच्ची आजादी का संदेश

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा के क्लब-27 में एक्टिव एनजीओज ग्रुप द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित ‘चर्चा ए आजादी’ विचार गोष्ठी ने साबित कर दिया कि आजादी केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिम्मेदारी है। शहर की विभिन्न प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने इस सार्थक संवाद में भाग लिया। प्रत्येक वक्ता को लगभग तीन मिनट का समय दिया गया, जिसमें उन्होंने अपने विचार संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से रखे।
चर्चा के दौरान महिलाओं के अधिकार, पर्यावरण एवं पेड़ों की कटाई, फॉरेस्ट एक्ट, शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नीतियां, नागरिक अधिकार और लोकतांत्रिक विरोध जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर विचार-विमर्श हुआ। कुछ वक्ताओं ने सरकार की नीतियों का समर्थन किया, तो कुछ ने उनमें सुधार की आवश्यकता बताई। एक ही मंच पर अलग-अलग विचारों को जगह मिलने से यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक संवाद का जीवंत उदाहरण बना।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विंग कमांडर आशीष सक्सेना ने नीट परीक्षा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की आजादी है। उन्होंने बताया कि इस आजादी का कुछ लोगों द्वारा दुरुपयोग भी हुआ। अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 से 2018 के बीच उनकी कंपनी द्वारा ऑनलाइन परीक्षाओं का संचालन किया गया था, जिसमें परीक्षा से एक दिन पहले रात 12 बजे तक प्रत्येक केंद्र पर प्रश्नपत्रों की पांच प्रतियां सुरक्षित भेजी जाती थीं और विशेष कोड के बिना उन्हें खोला नहीं जा सकता था। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी सुरक्षित तकनीकी व्यवस्था अपनाकर नीट जैसी परीक्षाओं को और अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाया जा सकता है।
कर्नल अमिताभ अमित ने कहा कि समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब समाज उन पर गंभीरता से चर्चा करे और आम राय बनाने का प्रयास करे। एक सैनिक के रूप में उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के उस अधिकार का समर्थन किया, जिसमें वे जनहित के मुद्दों पर सरकार के सामने अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर सकें।
डॉ. अशोक श्रीवास्तव ने आजादी को केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित न मानते हुए इसे क्रिटिकल एनालिसिस, अपनी बात कहने का अधिकार, समस्याओं के खिलाफ खुलकर विरोध करने का अधिकार और सकारात्मक बदलाव के लिए संघर्ष करने की स्वतंत्रता से जोड़ा।
एक्टिव एनजीओज ग्रुप के एडमिन डॉ. रंजन तोमर ने कहा कि आजादी का वास्तविक अर्थ तभी है जब जिम्मेदार नागरिक समाज की समस्याओं, आम जनता की परेशानियों और व्यवस्था की कमियों को बिना डरे सरकार के सामने रखें। कुरीतियों और गलत व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाना ही लोकतांत्रिक आजादी की सार्थकता है।
इस अवसर पर डॉ. कल्पना भूषण, श्रीमती विमलेश शर्मा, श्री उपदेश भारद्वाज, श्रीमती जयंति अयंगर, डॉ. सुनीता जेटली, दीपा चौधरी, डॉ. वंदना माथुर, डॉ. लीना चौहान, वीना भक्ता, रेखा शर्मा, नोफा के महासचिव सुरोजीत दासगुप्ता, सचिन गुप्ता, पंकज त्रिपाठी, प्रिया कुमारी, प्रदीप, श्रीमती रेखा शर्मा तथा शहर की विभिन्न एनजीओज एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आजादी केवल अधिकारों का नाम नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों, सवाल पूछने की स्वतंत्रता, गलत के खिलाफ आवाज उठाने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी भी है। यह गोष्ठी समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने की एक सार्थक पहल साबित हुई और उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

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