


नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)शनिवार यानी 19 सितंबर 2026 की शाम नोएडा पब्लिक लाइब्रेरी का सभागार सिर्फ कविताओं से नहीं, एक गहरी सोच से भी गूंज रहा था। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर नोएडा लोक मंच के सांस्कृतिक प्रकल्प “पहला कदम” द्वारा आयोजित सम्मान समारोह एवं काव्य-गोष्ठी में हिंदी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता, शिक्षा, कविता एवं कला-संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट हिंदी सेवियों को “हिंदी प्रहरी सम्मान–2026” से नवाजा गया।सम्मानित विभूतियों में प्रो. लल्लन प्रसाद, डॉ. राम शरण गौड़, श्री बाबा कानपुरी, डॉ. अशोक मधुप, श्री विनोद शर्मा, डॉ. ब्रज गोपाल सिंह, श्री लाल सिंह, श्रीमती सपना दत्ता, श्रीमती राजेश्वरी त्यागराजन और बेल्जियम से पधारे प्रवासी कवि एवं साहित्यकार श्री कपिल कुमार शामिल रहे। सभी को सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। ये सभी उस चुपचाप चलने वाले संघर्ष के प्रतीक थे, जो भाषा और संस्कृति को जीवित रखने का है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गौतमबुद्ध नगर के पूर्व जिलाधिकारी, साहित्यकार एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन. पी. सिंह ने जेन जी की चर्चा करते हुए कहा कि युवा देश के भविष्य नहीं, वर्तमान हैं। उन्हें सवाल पूछने से रोकने की बजाय विकल्प के साथ जवाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी सभी भाषाओं की मूल है। ये शब्द उस पीढ़ी को संबोधित थे जो तकनीक के दौर में अपनी जड़ों से जुड़ने की कोशिश कर रही है।सभागार में बैठी युवा पीढ़ी इन बातों को ध्यान से सुन रही थी।
जब बाबा कानपुरी की हास्य-व्यंग्य कविताएं गूंजीं और अन्य कवियों ने श्रृंगार, साहित्य और संस्कृति की रचनाएं सुनाईं, तो लगा जैसे यह संदेश कविताओं में जीवंत हो उठा हो। युवाओं को रोकना नहीं, उन्हें विकल्प देना—यही उस शाम का मूल मंत्र बना। कार्यक्रम में बेल्जियम से पधारे श्री कपिल कुमार ने भी हिंदी पर अपने विचार रखे।नोएडा लोक मंच के महासचिव महेश सक्सेना ने कहा कि हिंदी का सम्मान केवल एक भाषा का सम्मान नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, संस्कार, साहित्यिक विरासत और अपनी जड़ों का सम्मान है। एन. पी. सिंह के विचार ने इस बात को और गहराई दी। जब युवा वर्तमान हैं, तो उन्हें सवाल पूछने की आजादी देकर ही हिंदी को समृद्ध किया जा सकता है।कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन कवि विनोद पांडेय ने किया, जबकि द्वितीय सत्र का संचालन बी. जी. सिंह ने किया। हास्य कवि विनोद पांडेय ने अपने शब्दों और सहज अंदाज से सभी को बांधे रखा। गंभीर संदेशों के बीच उनकी प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत बनाए रखा और श्रोताओं को अंत तक कार्यक्रम से जोड़े रखा।
कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति अरुण चंद्र राय जी की रही। इस अवसर पर करण बंसल, प्रविंद्र शर्मा, अशोक पांडे, प्रेम सागर प्रेम, अजय कुमार तिवारी, ब्रजेश सिंह, अक्षय आनंद, सतीश यादव, जयवीर सिंह, सौरभ यादव, रोहित, भावेश चौहान, डी. पी. ठाकुर, संतोष ठाकुर, एस. एन. मिश्रा, सुरेश अग्रवाल एवं वीरेंद्र मलिक सहित नोएडा लोक मंच परिवार के अन्य सदस्य, साहित्यप्रेमी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन एक स्पष्ट संकल्प के साथ हुआ—“हिंदी का सम्मान करें, हिंदी को समृद्ध करें और हिंदी के प्रहरी बनें।” उस शाम कई छात्र-छात्राएं सोचते हुए निकले कि वे भी छोटे-छोटे प्रहरी बन सकते हैं। एक सवाल पूछकर, एक कविता लिखकर या गर्व से हिंदी बोलकर। प्रेरणा बड़े शब्दों से नहीं, सही दिशा देने से आती है। हिंदी सभी भाषाओं की मूल है—यह बात तब तक जीवित रहेगी, जब तक वर्तमान पीढ़ी को साथ लेकर चला जाएगा।
