विनोद शर्मा
नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
जनता की सुविधा के लिए विज्ञापन और बीओटी मॉडल पर बने नोएडा के सैकड़ों सार्वजनिक शौचालयों में से बड़ी संख्या आज बंद पड़ी है। जो खुलते हैं, उनके खुलने-बंद होने का कोई निश्चित समय नहीं है। प्राधिकरण राजस्व का अनुमान जारी करता रहा, मैदान पर सुविधा ठप रही।
प्राधिकरण से जुड़ी अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार शहर में कुल 256 सार्वजनिक शौचालय बताए गए। इनमें से पहले चरण के करीब 150 शौचालयों पर विज्ञापन आधारित मॉडल लागू किया गया। इन्हीं इकाइयों से 10 साल में लगभग 90 करोड़ रुपये राजस्व आने का अनुमान जताया गया, यानी सालाना करीब 9 करोड़ रुपये। एजेंसियों को परिसर में विज्ञापन लगाने का अधिकार दिया गया। बदले में सफाई, मरम्मत और संचालन उनकी जिम्मेदारी बताई गई।
उसी माह प्राधिकरण ने करीब 260 शौचालयों के रखरखाव के लिए तीन निजी एजेंसियों से पांच साल का बीओटी करार किया। दावा था कि विज्ञापन की आय से खर्च निकलेगा और बंद शौचालय फिर खुलेंगे।
जनवरी 2026 में एक मीडिया रिपोर्ट ने पब्लिक टॉयलेट 117, कम्युनिटी टॉयलेट 67, पिंक टॉयलेट 16 और यूरिनल ब्लॉक 120 बताए। कुल मिलाकर करीब 320 सुविधाएँ पीपीपी के तहत बताई गईं। यानी अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में एकरूपता नहीं है।
यह मॉडल पुराना है। 2018 में निजी कंपनियों से करार कर 84 शौचालय बनवाने की योजना बताई गई थी। 2019 तक कई इकाइयाँ बीओटी पर तैयार बताई गईं। तब भी आरोप लगा कि विज्ञापन बोर्ड लग गए, शौचालय चालू नहीं हुए।
स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 से पहले प्राधिकरण ने 300 से अधिक सार्वजनिक शौचालय बनवाने का दावा किया था। जुलाई 2026 में एक अन्य मीडिया रिपोर्ट ने लिखा कि रखरखाव अनुबंध खत्म होने और नई निविदा में देरी से एक महीने से अधिक समय तक 100 से ज्यादा शौचालय बंद रहे। सेक्टर 11, 12, 15, 16, 21 और कई 70 सीरीज इलाके प्रभावित बताए गए। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा था कि निविदा पास हो चुकी है और एक-दो हफ्ते में शौचालय खुल जाएंगे।
अगस्त 2026 की मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में भी कई शौचालय ताले में या बेहाल बताए गए। कुछ सुविधाएँ गूगल मैप पर अब भी खुली दिख रही थीं। निर्माण के कुछ महीनों बाद ही टूटे दरवाजे, खराब फ्लश और पानी-साबुन की कमी की शिकायतें दर्ज हुईं। सेक्टर 20 और 21 के बीच बना शौचालय पर ताला लटका है। नोएडा स्टेडियम के गेट नम्बर 4 के निकट बने शौचालय में एक आदमी पूरे परिवार के साथ रहता है। वह सुबह गेट नही खोलता। ज्यादातर में लोग अंदर बिजलीं का इस्तेमाल अपने लिए करते हैं जनता परेशान है।
अप्रैल 2026 में प्राधिकरण ने मई के पहले सप्ताह तक सभी बंद शौचालय खोलने का निर्देश बताया था। उसके बाद भी जुलाई-अगस्त में बड़े पैमाने पर बंद रहने की खबरें आईं। योजना का तर्क यह था कि प्राधिकरण का पैसा न लगे, एजेंसी विज्ञापन से कमाए और शौचालय चलाए। व्यवहार में ठेका खत्म होते ही ताला लग जाता है। खुलने का सार्वजनिक समय-सारणी नहीं है। कितने शौचालय इस समय रोज कितने घंटे खुले हैं, इसका अद्यतन ब्यौरा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध नहीं है।
