नोएडा,( नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के पास सेक्टर-147 में विज्ञापन बोर्ड लगाने के लिए एक पूरी तरह उगे हुए नीम के पेड़ को जड़ से काट दिया गया। वन विभाग ने मामले में कार्रवाई तो की, लेकिन सिर्फ 6 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क (जुर्माना) वसूल कर मामला निपटा दिया।
यह रकम इतनी कम है कि इससे पेड़ काटने वालों के हौसले और बढ़ सकते हैं।शिकायतकर्ता विक्रांत तोंगङ की 9 अगस्त 2026 को की गई शिकायत पर वन दरोगा शनि गौतम ने जांच की। जांच में पाया गया कि राम-ईश ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट, ग्रेटर नोएडा ने अपने संस्थान के विज्ञापन बोर्ड के प्रदर्शन के लिए नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर निर्माणाधीन अंडरपास के पास एक नीम के पेड़ को जड़ से तीन फीट ऊपर से काट दिया था।
मामले में उ.प्र. वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 और उ.प्र. अभिवहन नियमावली 1978 के तहत दादरी रेंज केस संख्या 40/2026-27 दर्ज किया गया। आरोपी को नोटिस भेजा गया। उसने लिखित बयान देकर अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को अधिनियम की धारा 15 के तहत केवल 6 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क जमा करवाया गया।पर्यावरणप्रेमियों का कहना है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आए दिन होर्डिंग, निर्माण या अन्य फायदे के लिए पेड़ अवैध रूप से काटे जा रहे हैं। ज्यादातर मामलों में शिकायत के बाद ही कार्रवाई होती है। जब कार्रवाई होती भी है तो जुर्माना इतना मामूली होता है कि अपराधी डरते नहीं। 6 हजार रुपये का जुर्माना एक पूर्ण विकसित नीम के पेड़ की कीमत नहीं हो सकती। इससे संदेश जाता है कि पकड़े जाने पर थोड़ा सा जुर्माना देकर छूट जाओ, वरना कोई बात नहीं।
स्थानीय लोग और पर्यावरण कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि ऐसे मामलों में भारी जुर्माना लगाया जाए और सिर्फ प्रशमन शुल्क पर निर्भर न रहकर आपराधिक मुकदमा भी चलाया जाए। तभी लोग पेड़ काटने से पहले सोचेंगे। अन्यथा अवैध पेड़ कटान यूं ही जारी रहेगा और नोएडा की हरियाली लगातार घटती जाएगी।वन विभाग और नोएडा प्राधिकरण की ओर से अभी तक इस कम जुर्माने पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। क्या लोकेशन तय करना नोएडा प्राधिकरण का काम है या होर्डिंग लगाने वाले खुद ही तय कर लेते हैं।
