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नोएडा के सेक्टर 45 में पंचायत चुनावों के लिए किसान संगठनों का संयुक्त अभियान, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर मांग

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
राष्ट्रीय देहात मोर्चा द्वारा जिले के 244 गांवों में पंचायत चुनाव कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत शुक्रवार को सदरपुर नोएडा के सेक्टर 45 में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक भारतीय किसान यूनियन मंच के संरक्षक सुरेंद्र प्रधान के कार्यालय पर हुई, जिसमें ग्रामीणों और सेक्टरवासियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं पर चर्चा की गई।

संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए प्रशासन पर चुनाव कराने का दबाव बनाया।बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष सुधीर चौहान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण द्वारा की जा रही अनियमितताओं की ओर स्पष्ट इशारा किया है। उन्होंने कहा, “सरकार ने भी इन गड़बड़ियों को नियंत्रित करने के लिए सुझाव दिए हैं। नोएडा के गांवों और सेक्टरों में रहने वाले लोग स्थानीय समस्याओं से परेशान हैं। गांवों में पंचायत चुनाव की व्यवस्था नहीं है, जबकि सेक्टरों में नगर निगम की स्थापना भी नहीं हुई है, जिससे बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।”

इसके अलावा, पंकज अवाना ने जोर देकर कहा कि पंचायत चुनाव कराना भारतीय लोकतंत्र में हमारा संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने अपील की कि ग्रामीणों को उनके हक से वंचित न रखा जाए। राष्ट्रीय देहात मोर्चा के अध्यक्ष राव संजय भाटी ने बैठक में कहा, “गांवों, देहातों और नगरीय पंचायतों में चुनाव न होने से आमजन के अधिकारों की उपेक्षा हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल पंप, बैंक्विट हॉल और अन्य विकास योजनाओं में स्थानीय ग्रामीणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”

भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी गेझा ने शासन-प्रशासन से तत्काल चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के इस अंधेरे दौर में गांववासी और सेक्टरवासी बिना प्रतिनिधियों के परेशान हैं। प्रशासन को शीघ्र कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोगों को उनके चुने हुए प्रतिनिधि मिल सकें।”

बैठक में विभिन्न वक्ताओं ने अपनी राय रखी। इनमें आजाद सिंह अवाना, आशीष चौहान (बरौला), प्रिंस भाटी (आकूपुर), अमित बसोया और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रिंकू यादव शामिल रहे। सभी ने एकजुट होकर अभियान को तेज करने का संकल्प लिया। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द चुनाव नहीं कराए गए, तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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