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नोएडा: आगरा के सुप्रसिद्ध कवि शीलेन्द्र कुमार वशिष्ठ के सम्मान में होली मिलन के रंग में रंगी “हिंदी काव्य गोष्ठी”

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
होली के उमंगपूर्ण रंगों और हिंदी साहित्य की सुंदरता का मधुर मेल नोएडा के सेक्टर 22 में देखने को मिला। विश्व हिंदी ई-सम्मेलन के तहत आगरा के जाने-माने कवि एवं साहित्यकार श्री शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ के सम्मान में कवि डॉ. राजपाल सिंह यादव के निवास पर एक भव्य होली मिलन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।

इस साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रमुख कवियों श्री शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ, डॉ. अटल मुरादाबादी, जे.पी. रावत, राम किंकर सिंह और विनोद शर्मा ने भाग लिया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से होली के उत्साह, जीवन के दर्शन, सपनों की उड़ान और सामाजिक वेदना को बड़ी खूबसूरती से व्यक्त किया, जिससे पूरा माहौल भावुकता और आनंद से भर उठा।प्रस्तुत कुछ चुनिंदा उत्कृष्ट पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:
श्री शीलेंद्र कुमार वशिष्ठ

उड़त गुलाल लाल-लाल ग्वाल-बाल गाल
गावैं दैकें करताल बोलैं मिलि होरी है।

विनोद शर्मा
समुद्र तट पर निहारता हूँ आती-जाती लहरों को,
नई लहरों सा जोश भरो, नई मंजिलें छुओ।

डॉ. अटल मुरादाबादी
प्रेम प्यार के गीत नहीं लिखने आते।
नहीं चापलूसी के शब्द मुझे भाते।

डॉ. राजपाल सिंह यादव
मन का मैल मिटाती है, तन घिस घिस कर धोती है।
जीवन की कोई होली ही यादगार होती है।

राम किंकर सिंह
ख्वाबों को रोज बल दो व हौसलों को पर दो,
मंजिल से ज्यादा सफर में मजा है। ये काव्य अंश होली के रंगों में जीवन के गहरे संदेशों को बाँधकर श्रोताओं के हृदय को छू गए। कार्यक्रम ने हिंदी कविता की जीवंतता को नई ऊर्जा प्रदान की और साहित्य प्रेमियों को गहरा आनंद दिया।

उपस्थित अतिथियों और श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं की खुलकर प्रशंसा की तथा ऐसे साहित्यिक आयोजनों को और अधिक बार-बार करने की इच्छा जताई।विश्व हिंदी ई-सम्मेलन के इस प्रयास से नोएडा में हिंदी साहित्य और संस्कृति की गतिविधियाँ नई चमक के साथ आगे बढ़ रही हैं। होली के इन काव्य रंगों ने सबके मन को रंग-बिरंगा कर दिया!

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