स्पेशल स्टोरी: तीन फीट का कद, अनंत हौसला: डॉ. गणेश बरैया की जीती हुई जंग

विनोद शर्मा
(नोएडा खबर डॉट कॉम)
गुजरात के भावनगर जिले के छोटे से गाँव गोरखी में, जहाँ खेतों की मिट्टी में सपने बोए जाते हैं, वहाँ एक अनोखी कहानी शुरू हुई। एक साधारण किसान के घर जन्मे गणेश बरैया का कद महज 3 फीट, वजन करीब 20 किलो, और 72% लोकोमोटर डिसएबिलिटी (बौनापन)। बचपन में गाँव वाले ताने मारते, बच्चे हँसते, और कुछ सर्कस वाले तो 5 लाख रुपये देकर “खरीदने” की बात तक करने लगे। लेकिन गणेश के दिल में एक अलग आग जल रही थी — “मैं डॉक्टर बनूँगा, गरीबों का दर्द बाँटूँगा।”

स्कूल में कुर्सी पर चढ़कर पढ़ाई, टीचर्स की शंका भरी नजरें, लेकिन गणेश ने कभी झुके नहीं। 12वीं में 87% अंक लाए। NEET क्रैक किया। सपना अब बस हाथ की दूरी पर था… लेकिन फिर आया सबसे बड़ा तूफान। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) और गुजरात सरकार ने साफ इंकार कर दिया:
“आपका कद कम है। ऑपरेशन थिएटर में कैसे खड़े रहेंगे? मरीज कैसे उठाएँगे? आप फिट नहीं हैं!”
एडमिशन रिजेक्ट। दुनिया ने कहा — “बस हो गया।”
गणेश ने कहा — “अभी नहीं!” उन्होंने हिम्मत का स्टूल उठाया और सिस्टम से टकराए। स्कूल प्रिंसिपल डॉ. दलपतभाई कटारिया ने आर्थिक मदद की, कंधा दिया।
गुजरात हाई कोर्ट गए → हार मिली, दिल टूटा, लेकिन इरादा नहीं।
सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँचे।

18 अक्टूबर 2018 — वो ऐतिहासिक दिन!
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया:
“शिक्षा का अधिकार कद से नहीं, काबिलियत से तय होता है। कोई भी शारीरिक सीमा सपनों को नहीं रोक सकती।” जीत!
2019 में भावनगर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन। पढ़ाई की असली जंग अब शुरू हुई। लेक्चर में स्टूल पर चढ़कर बैठना।
ऑपरेशन थिएटर में स्टूल की मदद से मरीज देखना।
लंबे समय तक खड़े रहना मुश्किल, लेकिन कभी शिकायत नहीं।
क्लासमेट्स पहले हैरान, फिर फैन बन गए।
प्रोफेसर्स कहते — “तुम्हारा हौसला हमें पढ़ाता है।”

MBBS पूरा किया। इंटर्नशिप पूरी की।
और 27 नवंबर 2025 को वो सुनहरा पल —
सरकारी अस्पताल (सिर-टी हॉस्पिटल), भावनगर में मेडिकल ऑफिसर बने।
आज वे गरीब मरीजों का इलाज करते हैं, दवा लिखते हैं, और मुस्कुराते हुए कहते हैं:
“मैं वही कर रहा हूँ जो बचपन से सपना था — गाँव के लोगों की सेवा।” डॉ. गणेश बरैया हमें क्या सिखाते हैं? कद छोटा हो सकता है, लेकिन इरादा अगर हिमालय जितना ऊँचा हो, तो कोई सिस्टम नहीं टिकता।
जब दुनिया 100 बार “नहीं” कहे, तो 101वीं बार कहो — “देखते हैं!”
हार तब नहीं आती जब लोग मना करें, हार तब आती है जब खुद हार मान लो।
सपने सच होते हैं — क्योंकि तुम उन्हें छोड़ते नहीं।

तो अगली बार जब कोई कहे “ये नामुमकिन है”, बस मुस्कुरा देना और याद रखना —
तीन फीट का एक लड़का सुप्रीम कोर्ट जीतकर डॉक्टर बन गया।
तुम क्या नहीं कर सकते?
डॉ. गणेश बरैया — छोटा कद, विशाल हौसला, अनंत प्रेरणा।
सपने देखो। लड़ो। जीतो।

(नोएडा खबर डॉट कॉम की स्पेशल स्टोरी)

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