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म्युनिसिपल वाटर रीयूज इनीशिएटिव” श्रेणी में “वाटर वॉरियर्स” के रूप में सम्मानित
नई दिल्ली,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
उत्तर प्रदेश के नोएडा प्राधिकरण को भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय एवं यूनिस्को के संयुक्त समर्थन से आयोजित वर्ल्ड वाटर अवार्ड 2025-26 में “म्युनिसिपल वाटर रीयूज इनीशिएटिव” श्रेणी में वाटर वॉरियर्स के रूप में विजेता घोषित किया गया है।
यह पुरस्कार नोएडा प्राधिकरण की जल पुनर्चक्रण एवं पुन: उपयोग की उत्कृष्ट पहलों के लिए प्रदान किया गया, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दर्शाता है।
सोमवार को नई दिल्ली स्थित होटल ललित में वाटर डाइजेस्ट वाटर अवार्ड टीम द्वारा आयोजित भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल एवं राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी की गरिमामय उपस्थिति रही।
मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्वयं इस श्रेणी में नोएडा प्राधिकरण को पुरस्कार प्रदान किया।पुरस्कार ग्रहण करने के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल एवं महाप्रबंधक (जल) आर.पी. सिंह अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में हुए अभूतपूर्व विकास और ईमानदार, प्रगतिशील विजन का प्रमाण है।
नोएडा प्राधिकरण ने जल संरक्षण एवं पुन: उपयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:वर्तमान में सभी प्लांटों से कुल 260 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) ट्रीटेड (शोधित) जल उपलब्ध है।
इस 260 MLD शोधित जल में से लगभग 90 MLD का उपयोग भूजल स्तर सुधार, हरित पट्टी, पार्क, गोल्फ कोर्स, वेटलैंड, निर्माण कार्य, अग्निशमन, तालाब भराव एवं सड़क छिड़काव आदि में किया जा रहा है।
सेक्टर-54 में पूर्व वेस्ट लैंड को पुनर्जीवित कर 20 MLD शोधित जल से एक सुंदर वेटलैंड विकसित किया गया है, जहां विविध जलीय जीव-जंतु निवास कर रहे हैं।
प्राधिकरण ने और अधिक शोधित जल के उपयोग के लिए प्रतिबद्धता जताई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 125 MLD शोधित जल को विभिन्न कार्यों में उपयोग करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पुरस्कार नोएडा प्राधिकरण की “वाटर रीयूज” पहल को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करता है, जो जल संकट से निपटने में एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। जल शक्ति मंत्रालय की इस पहल से प्रेरित होकर नोएडा अब और अधिक सतत जल प्रबंधन की दिशा में अग्रसर है।
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