विनोद शर्मा
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
जब नोएडा शहर आसमान छूने की तैयारी कर रहा है — जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने की — तब उसके मूल गांव अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। 1976-78 में जिन गांवों की जमीन अधिग्रहित कर आधुनिक नोएडा बसाया गया, उनके निवासी आज भी बजबजाती गंदी गलियों, गहरी नालियों और गैस संकट में सिलेंडर कंधे पर लादकर भागते नजर आ रहे हैं। हरौला, नयाबांस, अट्टा, चौड़ा रघुनाथपुर, निठारी, मोरना, गिझोड़, झुंडपुरा, छलेरा, सदरपुर, बरौला समेत दर्जनों गांवों की जमीन लेकर नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टरों का विकास किया। इन गांवों ने शहर को आवास और जमीन दी, लेकिन बदले में उन्हें गंगा जल, पक्की सड़कें, बेहतर ड्रेनेज और अब PNG गैस जैसी सुविधाओं से वंचित रखा गया।
2007 का वादा, 2026 में भी अधूरा
वर्ष 2007 में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के साथ सेक्टरों में PNG लाइन बिछाने का एग्रीमेंट हुआ। लगभग 3-4 साल में काम चला और 2011-12 के आसपास सेक्टरों में घर-घर PNG पहुंच गई। लेकिन नोएडा के 81 गांवों में से 2022 तक केवल 3 गांवों में ही यह सुविधा पहुंच पाई थी। आज 2026 में भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं दिखती।अभी जब पश्चिम एशिया तनाव के कारण देशभर में LPG सिलेंडर का संकट गहराया है, तो नोएडा के इन गांवों में हालात और बिगड़ गए हैं। हरौला जैसे गांवों में मजदूर परिवार दिन-रात सिलेंडर की तलाश में भटक रहे हैं। कुछ तो कह रहे हैं — “गैस नहीं तो खाना नहीं, शायद गांव लौटना पड़ेगा।”
सेक्टरों में PNG होने से राहत है, लेकिन गांव अभी भी पुराने सिलेंडर पर निर्भर हैं।
गंदगी भरी गलियां और नीचे धंसते गांव
मुख्य मार्गों से कई गांव नीचे हो गए हैं। नालियां गहरी हो गईं, सड़कें टूट-फूट गईं। कई गांवों में 25-30 साल पहले दोबारा बनाई गई गलियां आज भी गंदगी से भरी पड़ी हैं। सफाई की मशीनें सेक्टरों तक सीमित हैं, गांवों में अनुपस्थित। अवैध कब्जे गांवों के इर्द-गिर्द फैल रहे हैं, लेकिन उनका स्टेटस साफ नहीं। गंगा जल प्रोजेक्ट Greater Noida में मार्च 2026 तक कई सेक्टरों में पूरा होने वाला है, लेकिन नोएडा के मूल गांवों में पहुंच अभी भी सीमित है।
क्या है समाधान का रास्ता?
यह सोचने का वक्त है कि जिन्होंने जमीन दी, उन्हें प्राथमिकता मिले। केंद्र सरकार PNG विस्तार को तेज कर रही है। IGL नई कनेक्शन्स बढ़ा रहा है और LPG संकट के बीच PNG को बढ़ावा दे रहा है। Noida Authority को इन गांवों में रोड डिगिंग की अनुमति तेजी से देनी चाहिए।जन प्रतिनिधि, प्राधिकरण और IGL को मिलकर इन गांवों को मुख्यधारा में लाना चाहिए:PNG लाइन का चरणबद्ध विस्तार
गंगा जल,अच्छी सड़कें और बेहतर ड्रेनेज
अवैध कब्जों पर पारदर्शी फैसला — किसान की जमीन है तो किसान को, वरना सुनियोजित विकास
नोएडा प्राधिकरण के 50वें वर्ष में “समावेशी विकास” (Inclusive Development) सिर्फ शब्द नहीं रहना चाहिए। जेवर एयरपोर्ट से उड़ान भरते वक्त नोएडा के मूल निवासियों को भी यह महसूस होना चाहिए कि शहर ने उन्हें नहीं भुलाया।समय आ गया है — जिन गांवों ने नोएडा को बसाया, उन्हें अब नोएडा की आधुनिक सुविधाएं दें।
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