नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर लक्ष्मी नारायण मंदिर, सेक्टर-56, नोएडा में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन आरंभ हुआ। शुभारंभ के अवसर पर महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली और मधुर भजन गाते हुए सेक्टरवासियों ने शोभायात्रा के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ किया।
प्रथम दिवस पर वृंदावन धाम से पधारे भागवताचार्य आचार्य मनीष कौशिक ने श्रीमद्भागवत महापुराण का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ मानव जीवन को आनंद, प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण करने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी विचार व्यक्त किए तथा कहा कि भागवत कथा सामाजिक समरसता का सर्वोच्च संदेश देती है।
कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री राम रसायन सेवा संस्थान के संस्थापक एवं कथाव्यास आचार्य मनीष कौशिक जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, मानव समानता और विश्वबंधुत्व का दिव्य घोष है।
उन्होंने कहा कि भगवान के लिए न कोई ऊँचा है, न नीचा; न कोई धनी है, न निर्धन; न कोई जाति विशेष का है और न किसी वर्ग विशेष का। भगवान केवल हृदय की निर्मलता, प्रेम और भक्ति को देखते हैं। जब भगवान श्रीकृष्ण अपने धाम प्रस्थान करने लगे, तब उन्होंने विदुर का स्मरण किया। विदुर का जन्म राजमहलों की परंपरागत प्रतिष्ठा में नहीं हुआ था, किंतु उनकी भक्ति और धर्मनिष्ठा ने उन्हें भगवान का परम प्रिय बना दिया। यह प्रसंग बताता है कि ईश्वर के समक्ष जन्म नहीं, गुण और आचरण का महत्व है।
आचार्य श्री ने कहा कि भागवत के प्रत्येक प्रसंग में सामाजिक समरसता का संदेश निहित है। गजेंद्र हाथी थे, फिर भी भगवान उनकी पुकार पर दौड़े चले आए। ध्रुव बालक थे, फिर भी उन्हें परम पद प्राप्त हुआ। कुब्जा समाज में उपेक्षित मानी जाती थीं, किंतु भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सम्मान और अपनत्व दिया। सुदामा निर्धन थे, परंतु भगवान ने उन्हें अपने हृदय से लगाया। इन प्रसंगों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर की दृष्टि में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है।उन्होंने कहा कि आज समाज जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति और वैचारिक मतभेदों जैसे अनेक विभाजनों से प्रभावित है। ऐसे समय में भागवत का संदेश यह सिखाता है कि प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का अंश विद्यमान है। जब हम दूसरे व्यक्ति में ईश्वर का स्वरूप देखने लगते हैं, तब भेदभाव, घृणा और विद्वेष स्वतः समाप्त होने लगते हैं।
आचार्य मनीष कौशिक जी महाराज ने कहा कि भागवत का मूल संदेश है—सम्मान सबका, कल्याण सबका और प्रेम सबके लिए। यह ग्रंथ समाज को संघर्ष नहीं, सहयोग; विभाजन नहीं, एकता; और अहंकार नहीं, विनम्रता का मार्ग दिखाता है। यदि समाज को स्थायी शांति और सौहार्द की दिशा में आगे बढ़ाना है, तो भागवत के समरसता के संदेश को घर-घर तक पहुँचाना होगा।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सभी अपने व्यवहार में प्रेम, करुणा, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान को स्थान दें। यही भागवत का वास्तविक अनुसरण है और यही एक सशक्त, समरस तथा आध्यात्मिक रूप से जागृत समाज के निर्माण का आधार है।