ग्रेटर नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
सेक्टर पाई-1 (ऐच्छर गांव) स्थित पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शाखा में खाताधारकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से करीब 35 करोड़ रुपये गायब होने का आरोप सामने आया है। ज्यादातर पीड़ित किसान और ग्रामीण हैं, जिन्हें जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) के लिए जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मिला था। बैंक ने ब्रांच मैनेजर समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। बीटा-2 थाने में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस तथा बैंक की आंतरिक जांच चल रही है।
पब्लिक का पैसा कैसे गायब हुआ?
ग्राहकों का आरोप है कि उनकी जानकारी, सहमति, ओटीपी या हस्ताक्षर के बिना एफडी समय से पहले तोड़ दी गईं और पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। कई लोगों को ट्रांजैक्शन का कोई एसएमएस अलर्ट भी नहीं मिला। कुछ मामलों में ग्राहकों को पासबुक अपडेट या बैलेंस चेक करने से रोका गया और कहा गया कि आरबीआई ऑडिट चल रहा है। एक मामले में म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर दस्तावेजों पर साइन कराकर रकम दूसरे खाते में भेज दी गई।
उदाहरण:
- विजेंद्र सिंह (किसान) के खाते में मुआवजे के करीब 87-88 लाख रुपये थे, अब सिर्फ 1 लाख बचे।
- हनीफ खान के 39 लाख रुपये गायब।
- श्रीचंद की 1.16 करोड़ की एफडी खाली।
- कई परिवारों के खातों में 94 लाख से 1.29 करोड़ तक के मुआवजे की रकम गायब या शून्य बैलेंस दिख रहा।
भारतीय किसान यूनियन ने दावा किया है कि कुल रकम 130-150 करोड़ तक हो सकती है, हालांकि आधिकारिक आंकड़ा जांच के बाद तय होगा।
मामला कैसे सामने आया?
27-28 अक्टूबर के आसपास जब ग्राहक एफडी रिन्यू कराने, पैसे निकालने या पासबुक अपडेट कराने बैंक पहुंचे तो बैलेंस कम या शून्य मिला। श्रीचंद (बिरोंडी/विरोडी) की शिकायत के बाद अन्य लोग भी आगे आए। बैंक के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गया। कई ग्राहकों ने कहा कि उन्होंने कोई दस्तावेज साइन नहीं किए और न ही कोई मैसेज मिला।
अभी तक क्या शिकायत हुई और क्या एक्शन हुआ?
- अब तक 16 से 25 से ज्यादा खाताधारकों ने बीटा-2 थाने में लिखित शिकायत दी है।
- पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) (पब्लिक सर्विस/बैंकर द्वारा क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
- ग्रेटर नोएडा के एसीपी जांच की अगुवाई कर रहे हैं। आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की भूमिका भी चर्चा में है।
- पीएनबी के क्षेत्रीय कार्यालय (नोएडा सेक्टर-1) ने ब्रांच मैनेजर समेत 5 कर्मचारियों को सस्पेंड किया और नए स्टाफ की तैनाती की।
- बैंक की एंटी-करप्शन/विजिलेंस टीम और आंतरिक जांच जारी है।
गड़बड़ी क्यों हुई?
जांच अभी शुरुआती चरण में है। आरोप है कि शाखा के कर्मचारी ही बड़े मुआवजे वाले खातों को टारगेट कर रकम दूसरे खातों में डायवर्ट करते रहे। एसएमएस अलर्ट बंद करना या देरी से जानकारी देना भी आरोपों में शामिल है। सटीक मकसद (चोरी, गबन या अन्य) और कितने लोगों की मिलीभगत थी, यह जांच में साफ होगा। पब्लिक सेक्टर बैंक होने के बावजूद आंतरिक निगरानी में कमजोरी उजागर हुई है।
बैंक के अफसर क्या कहते हैं?
पीएनबी के चीफ मैनेजर राकेश निगम ने शाखा के बाहर इकट्ठा लोगों को आश्वासन दिया कि यह घोटाला है, दोषियों को जेल जाएगी और सभी स्टाफ ट्रांसफर हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पैसा एक हफ्ते के अंदर वापस कर दिया जाएगा। अन्य बैंक अधिकारियों ने 10-15 दिन या जल्द ही रकम खातों में वापस करने की बात कही। लीड बैंक मैनेजर राम विनोद कुमार ने कहा कि जानकारी इकट्ठा की जा रही है और नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। बैंक ने आधिकारिक तौर पर कुल रकम का आंकड़ा अभी जारी नहीं किया है।
जनता का डर कैसे दूर होगा?
पीएनबी भारत सरकार का उपक्रम है। बैंक ने स्पष्ट रूप से पैसे वापस करने का आश्वासन दिया है। जांच में दोष साबित होने पर बैंक आमतौर पर ग्राहकों की रकम पूर्ण रूप से भरपाई करता है ताकि भरोसा बना रहे। डिपॉजिट इंश्योरेंस (डीआईसीजीसी) के तहत 5 लाख तक की सुरक्षा अलग से है, लेकिन यहां रकम ज्यादा होने से बैंक की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है। पुलिस और बैंक जांच के नतीजे आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रभावित लोगों से अपील है कि वे लिखित शिकायत दर्ज कराएं और बैंक से नियमित अपडेट लें।यह मामला पब्लिक सेक्टर बैंकों में आंतरिक नियंत्रण और बड़े मुआवजे वाले खातों की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। जांच पूरी होने तक सटीक आंकड़े और जिम्मेदारी तय होगी।
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