विनोद शर्मा
लखनऊ/नोएडा। नोएडा खबर डॉट कॉम।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घेरते हुए उन्हें ‘रणछोड़’ करार दिया है। चौधरी का हमला अखिलेश यादव के उस बयान पर है, जिसमें उन्होंने विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया था। इस हमले में नोएडा का जिक्र करते हुए पुराने मुद्दे को भी उछाला गया है।
पंकज चौधरी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “रणछोड़ अखिलेश। पहले चुनौती दी, अब भाग खड़े हुए। अब क्या सीधे लोकसभा से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे? यह बिल्कुल वैसी ही बात है, जैसे बिना चुनाव के रिजीम चेंज। यही सपाइयों की सच्चाई है। जब सत्ता में थे, तब नोएडा जाने से डरते थे। अब चुनाव लड़ने से डर रहे हैं।”
क्या था अखिलेश यादव का बयान ?
वाराणसी दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने पत्रकारों से कहा था कि “हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं।” इस बयान को भाजपा ने हार के डर से पीछे हटने के रूप में पेश किया। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने भी इसे “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” बताया।
नोएडा का पुराना संदर्भ और राजनीतिक संदेश
पंकज चौधरी का नोएडा वाला तंज अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल (2012-2017) की ओर इशारा करता है, जब सपा सरकार पर कानून-व्यवस्था और पश्चिमी उत्तर प्रदेश/एनसीआर क्षेत्र में प्रभाव को लेकर आरोप लगते रहे थे।
नोएडा जैसे विकसित और शहरी क्षेत्र को घेरना भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां विकास, कानून-व्यवस्था और निवेश के मुद्दे पर भाजपा अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषण: 2027 की जंग का ट्रेलर
यह हमला सिर्फ व्यक्तिगत तंज नहीं, बल्कि 2027 चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। पंकज चौधरी, जो खुद कुर्मी समुदाय से आते हैं और ओबीसी वोटों को साधने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को “पारिवारिक” बताते रहे हैं। अखिलेश यादव के चुनाव न लड़ने के फैसले को भाजपा कमजोरी के रूप में पेश कर रही है, जबकि सपा इसे रणनीतिक कदम मान सकती है।
नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटें दोनों दलों के लिए अहम हैं। भाजपा यहां संगठन और विकास के मुद्दे पर भरोसा जता रही है, जबकि सपा मतदाता सूची, प्रशासनिक पक्षपात और पुरानी यादों को उछालकर हमला कर रही है। पंकज चौधरी का यह बयान दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी का संकेत है। आने वाले दिनों में नोएडा समेत पूरे प्रदेश में और तीखी राजनीतिक लड़ाई देखने को मिल सकती है।
