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नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम) गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट में एक संवेदनशील आपराधिक मामले की जांच में हुई लापरवाही पर पुलिस कमिश्नर आइपीएस लक्ष्मी सिंह ने तुरंत और कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में उचित धाराओं को शामिल न करने की वजह से डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जबकि थाना फेस-3 के थाना प्रभारी और विवेचक को तत्काल निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के मुताबिक, 17 मार्च 2026 को थाना फेस-3 में एक आवेदिका ने मुकदमा संख्या 111/2026 दर्ज कराया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस.) की धारा 69, 351 और 308 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई। अभियोग की उच्च स्तरीय समीक्षा में पाया गया कि मामले में कुछ बेहद महत्वपूर्ण और सुसंगत धाराएं शामिल नहीं की गईं, जिनमें धारा 5(3) उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम
धारा 3(2)(v) अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम आदि प्रमुख हैं।

इस गंभीर चूक के चलते पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने विभागीय स्तर पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी से स्पष्टीकरण तलब किया है, क्योंकि उनके पर्यवेक्षण में जांच प्रक्रिया में यह कमी आई।
एसीपी-1 सेंट्रल नोएडा उमेश यादव के खिलाफ प्रारंभिक जांच शुरू की गई है। थाना फेस-3 के थाना प्रभारी पुनीत कुमार और विवेचक उप-निरीक्षक प्रीति गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
उपरोक्त सभी अधिकारियों (एसीपी उमेश यादव, थाना प्रभारी पुनीत कुमार और विवेचक प्रीति गुप्ता) की विभागीय जांच एडीसीपी नोएडा को सौंपी गई है।

पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पीड़ितों के न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्राथमिकी में सभी सुसंगत धाराओं का समावेश अनिवार्य है। ऐसी लापरवाही, विशेषकर संवेदनशील सामाजिक-धार्मिक मुद्दों से जुड़े मामलों में, बिल्कुल अस्वीकार्य है। कमिश्नरेट ने अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई हुई है।यह कार्रवाई नोएडा पुलिस में उच्च स्तरीय निगरानी और त्वरित सुधार की मिसाल के रूप में देखी जा रही है, ताकि भविष्य में जांच प्रक्रिया में कोई कोताही न रहे और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।

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