नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
सेक्टर-56 में श्री राम रसायन सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथाव्यास आचार्य मनीष कौशिक ने ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तिमय वातावरण में कथा सुनने पहुँचे।
ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए आचार्य मनीष कौशिक ने कहा कि संसार केवल सीमित वस्तुएँ दे सकता है, जबकि भगवान वह प्रदान करते हैं जो सर्वाधिक मूल्यवान है। इसलिए उनसे केवल सांसारिक कामना नहीं, बल्कि सुख, शांति और भक्ति की याचना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुख और शांति भगवान का स्वाभाविक स्वरूप हैं। संसार में क्षणिक शांति मिल सकती है, किंतु सनातन शांति भगवान से प्राप्त होती है। ध्रुव के चरित्र से भक्ति और ज्ञान के साथ जीवन-व्यवहार की शिक्षा भी मिलती है।
प्रह्लाद चरित्र पर उन्होंने कहा कि दृढ़ विश्वास वाले व्यक्ति के मार्ग में कठिनाइयाँ आती हैं, पर वे उतनी बड़ी नहीं होतीं जितनी दिखाई देती हैं। जो भक्त भगवान की स्मृति और शरण में रहता है, उसे संकट सामान्य जन की अपेक्षा कम प्रतीत होते हैं।उन्होंने कहा कि भागवत के मूल स्वरूप को समझने के लिए ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र का श्रवण आवश्यक है। इन प्रसंगों से श्रद्धा दृढ़ होती है, निष्ठा बढ़ती है और भक्ति परिपक्व होती है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने “राधा-कृष्ण भगवान की जय” के जयघोष लगाए।
