विनोद शर्मा
नई दिल्ली, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने साफ कहा है कि पार्टी सभी 403 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी कर रही है, जबकि SP प्रमुख अखिलेश यादव ने पहले INDIA ब्लॉक के तहत गठबंधन जारी रखने की बात कही थी।
इस बयान से सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी अब अखिलेश यादव का साथ नहीं चाहते? हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से लगता है कि दोनों पार्टियां अलग-अलग रास्ते पर चलने की तैयारी में हैं, जो BJP के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
अविनाश पांडे का बयान: अकेले लड़ने पर फोकस
कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडे ने रविवार को मुम्बई में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत मजबूत करने पर जोर दे रही है। उन्होंने बताया कि 1.69 लाख से ज्यादा बूथ-लेवल एजेंट नियुक्त किए गए हैं, जो वोटर वेरिफिकेशन में लगे हैं। साथ ही, करीब दो लाख कार्यकर्ताओं को रजिस्टर और ट्रेनिंग दी गई है। पांडे ने जोर देकर कहा, “बिना उत्तर प्रदेश में मजबूत हुए कांग्रेस केंद्र में सत्ता में नहीं लौट सकती। हम सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।” उन्होंने गठबंधन पर फैसला हाईकमान पर छोड़ दिया, लेकिन यह साफ है कि पार्टी स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है। जनवरी से राज्य भर में 17 से ज्यादा जनसभाओं की योजना भी बनाई गई है।
इसके उलट, अखिलेश यादव ने जून 2025 में कहा था कि SP INDIA ब्लॉक के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी, जिसमें कांग्रेस शामिल है। उन्होंने PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया था। राहुल गांधी ने भी अखिलेश के जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हुए PDA एजेंडे पर साथ लड़ने का वादा किया था।
लेकिन हाल के महीनों में दोनों पार्टियों के रिश्तों में दरार साफ नजर आ रही है।
हाल के घटनाक्रम: बिहार से शुरू हुई दरार
दोनों पार्टियों के बीच तनाव की शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव से हुई, जहां INDIA ब्लॉक की हार के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। अखिलेश यादव ने RJD के लिए प्रचार किया, लेकिन कांग्रेस के लिए नहीं। कांग्रेस नेताओं ने इसे ‘अहंकार’ बताया, जबकि SP ने कांग्रेस पर सहयोग न करने का आरोप लगाया।
इसके बाद यूपी में पंचायत चुनाव (2026 की शुरुआत में) और MLC चुनाव (नवंबर 2026) में दोनों पार्टियां अलग-अलग लड़ रही हैं। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि पार्टी सभी 403 विधानसभा सीटों पर कैडर मजबूत कर रही है और अकेले लड़ने की तैयारी में है। SP ने भी महाराष्ट्र और दिल्ली में अलग रास्ता चुना, जहां उसने AAP का साथ दिया।SP नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि पार्टी मजबूत क्षेत्रीय सहयोगियों का साथ देगी, लेकिन यूपी में बदले की उम्मीद रखती है। वहीं, कांग्रेस ‘सृजन अभियान’ के तहत अपनी ताकत बढ़ा रही है, ताकि 2027 में सीट-शेयरिंग में बेहतर सौदा कर सके। 2022 में दोनों अलग लड़े थे, जहां SP को 111 और कांग्रेस को सिर्फ 2 सीटें मिलीं। लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन को 36 के मुकाबले 43 सीटें मिली।
राजनीतिक विश्लेषण: राहुल की रणनीति में बदलाव?
यह सस्पेंस राहुल गांधी की रणनीति से जुड़ा लगता है। लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में राहुल कांग्रेस को यूपी में पुनर्जीवित करना चाहते हैं, जहां पार्टी दशकों से कमजोर है। प्रियंका गांधी को 2027 में फिर से नेतृत्व सौंपे जाने की चर्चा है, जो संकेत देती है कि कांग्रेस अब SP पर निर्भर नहीं रहना चाहती। 2024 की सफलता से कांग्रेस को आत्मविश्वास मिला है, लेकिन SP भी मजबूत है और सीटों पर ज्यादा दावा कर सकती है। अगर राहुल अखिलेश का साथ नहीं चाहते, तो इसका मतलब कांग्रेस की स्वतंत्र छवि मजबूत करना हो सकता है – खासकर दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर फोकस करके। लेकिन अलग लड़ने से विपक्ष बंट सकता है, जिससे BJP को फायदा मिलेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की हार ने INDIA ब्लॉक में दरार डाली है, और यूपी में यह और गहरा सकती है। SP कांग्रेस को ‘अहंकारी’ मानती है, जबकि कांग्रेस SP पर सहयोग न करने का आरोप लगाती है।
अगर गठबंधन टूटा, तो 2027 में त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है, जो योगी आदित्यनाथ की BJP के लिए आसान रास्ता खोल सकता है। हालांकि, दोनों पार्टियां अभी गठबंधन को ‘बरकरार’ बता रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अलगाव साफ है।यह स्थिति विपक्ष की एकता पर सवाल उठाती है। क्या राहुल और अखिलेश व्यक्तिगत रिश्तों को पार्टी हितों से ऊपर रख पाएंगे? आने वाले महीनों में पंचायत और MLC चुनाव इसकी परीक्षा लेंगे।
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